मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच बुधवार को एक फैसले ने खास हलचल पैदा (Employment Update) कर दी। वर्षों से लागू एक ऐसी शर्त, जिसे लेकर कई अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाते थे, अब हटाई जा रही है। फैसले की जानकारी सामने आते ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और कर्मचारियों के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई।
राजधानी से लेकर जिलों तक लोग इस बदलाव को रोजगार से जुड़े बड़े निर्णय के रूप में देख रहे हैं। कई अभ्यर्थियों का मानना है कि इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी जो पहले केवल एक नियम की वजह से सरकारी सेवा के अवसरों से दूर हो जाते थे।
मुख्यमंत्री ने दिए नियम बदलने के निर्देश : Employment Update
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासकीय सेवाओं में लागू दो बच्चों की सीमा संबंधी प्रावधान को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग को आवश्यक संशोधन करने और नए प्रारूप को तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग को कहा गया है कि पुराने प्रारूप को तत्काल हटाया जाए और संशोधित नियमों को नियमानुसार प्रकाशित किया जाए ताकि नई व्यवस्था लागू की जा सके।
पच्चीस वर्षों से लागू थी व्यवस्था
राज्य में यह नियम वर्ष 2001 से प्रभावी था। इसके तहत 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए अयोग्य माना जाता था। सिर्फ भर्ती ही नहीं, बल्कि सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए भी यह नियम लागू था। दो से अधिक बच्चों की स्थिति को सेवा आचरण से जुड़ा मामला माना जाता था।
भर्ती प्रक्रिया में मिलेगी राहत
नए फैसले के बाद अब तीन या उससे अधिक बच्चे होने की वजह से किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरी से वंचित (Employment Update) नहीं किया जाएगा। शासकीय सेवाओं में आवेदन करने वाले उम्मीदवार इस आधार पर अपात्र नहीं माने जाएंगे। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पूर्व में निपटाए जा चुके मामलों पर लागू नहीं होगा। पहले हुई कार्रवाई यथावत रहेगी।
कई लोगों का करियर हुआ था प्रभावित
बीते दो दशकों में इस नियम के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर होना पड़ा था। कई शिक्षक उम्मीदवार भी नियुक्ति पाने से वंचित रह गए थे। कुछ मामलों में कर्मचारियों की पदोन्नति और वेतनवृद्धि पर भी असर पड़ा। नौकरी बचाने के लिए कई लोगों को निजी जीवन से जुड़ी जानकारियों को लेकर भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था।
नई नीति पर टिकी निगाहें
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव माना (Employment Update) जा रहा है। अब भर्ती से जुड़े संशोधित नियम जारी होने के बाद इसकी पूरी तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल अभ्यर्थियों और कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि नई व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और आगामी भर्तियों में इसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।
