Electric Fencing : भाड़म हादसे के बाद अदालत हुई सख्त, तीन मौतों पर मांगा जवाब, अब तय होगी जिम्मेदारी
भाड़म गांव में तीन लोगों की करंट से मौत के बाद पूरे इलाके में इस घटना को लेकर चर्चा (Electric Fencing) तेज है। गांव से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी घटनाएं बार बार क्यों सामने आ रही हैं। लोगों के बीच सुरक्षा इंतजामों और बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता साफ दिखाई दे रही है।
घटना के बाद मामला अदालत तक पहुंचा और अब इस पर बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। अदालत ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए खुद संज्ञान लिया है और जिम्मेदार अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
अदालत ने मांगा शपथपत्र Electric Fencing
कोटा ब्लॉक के भाड़म गांव में करंट लगने से हुई तीन मौतों के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध संचालक और ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें विद्युत ढांचे के निरीक्षण, रखरखाव की मौजूदा व्यवस्था, सुरक्षा उपायों और लापरवाही तय करने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।
बार बार हो रही घटनाओं पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश और खंडपीठ ने कहा कि बिजली प्रवाहित बाड़ के कारण लगातार लोगों की जान जा रही है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी नीति तैयार करने और मजबूत सुरक्षा उपाय लागू करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे दोबारा न हों।
खेतों और संपत्तियों में बिजली वाली बाड़ बनी खतरा
अदालत ने कहा कि कई मामलों में लोग अपनी फसल, मकान या पशुओं की सुरक्षा के लिए खेतों और अन्य संपत्तियों के चारों ओर बिजली प्रवाहित बाड़ लगा देते हैं। अनजाने में इसके संपर्क में आने वाले लोगों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ता है और कई बार उनकी जान भी चली जाती है।
इंसानों के साथ जानवर भी हो रहे शिकार
अदालत ने यह भी माना कि ऐसे हादसों का असर केवल लोगों तक सीमित (Electric Fencing) नहीं है। कई घरेलू और वन्य जीव भी बिजली वाली बाड़ की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। इसलिए मजबूत नियामकीय व्यवस्था और प्रभावी सुरक्षा तंत्र विकसित करना जरूरी है। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध संचालक को इस जनहित याचिका में प्रतिवादी बनाया जाए।
समयबद्ध कार्ययोजना बताने के निर्देश
खंडपीठ ने अधिकारियों से पूछा है कि क्या इस तरह के मामलों को रोकने के लिए कोई स्पष्ट नीति या मानक संचालन प्रक्रिया लागू है। यदि ऐसी व्यवस्था नहीं है तो नई नीति तैयार कर उसे लागू करने की कार्ययोजना और समयसीमा भी शपथपत्र में स्पष्ट रूप से बताई जाए, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



