छत्तीसगढ़

Deportation Order : दो विदेशी युवतियों को राहत, हाई कोर्ट ने स्वदेश भेजने के दिए निर्देश

रायपुर में पिछले कई महीनों से हिरासत में रखी गई दो विदेशी युवतियों के मामले को लेकर कानूनी हलकों में चर्चा (Deportation Order) तेज थी। मामले की सुनवाई के दौरान यह सवाल लगातार उठ रहा था कि आखिर दोनों महिलाओं का भविष्य क्या होगा और उन्हें कब तक डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा। अब अदालत के ताजा आदेश के बाद इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट होती नजर आ रही है।

सुनवाई की खबर सामने आते ही प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में भी हलचल बढ़ गई। दोनों महिलाओं की ओर से जल्द राहत की मांग की जा रही थी, वहीं संबंधित एजेंसियां भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जुटी थीं। अदालत के आदेश के बाद अब उनके स्वदेश लौटने का रास्ता साफ हो गया है।

अदालत ने दिए आवश्यक निर्देश : Deportation Order

बिलासपुर हाईकोर्ट ने उज्बेकिस्तान की दो महिला नागरिक फेरूजा सबिरोवा और दिनोरा सफ्युतदिनोवा को राहत प्रदान करते हुए उन्हें उनके देश भेजने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास की ओर से भी यह सहमति जताई गई कि दोनों महिलाओं को जल्द उनके देश वापस भेजा जाना चाहिए। इसके बाद अदालत ने डिपोर्टेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश जारी किया।

जनवरी से हिरासत में थीं दोनों महिलाएं

याचिका फेरूजा सबिरोवा और दिनोरा सफ्युतदिनोवा की ओर से प्रस्तुत की गई थी। उनकी तरफ से अधिवक्ता शांतम पाटिल ने अदालत को बताया कि दोनों महिलाओं को जनवरी 2026 से रायपुर में हिरासत में रखा गया था।

बाद में उन्हें केंद्रीय जेल रायपुर स्थित डिटेंशन सेंटर में स्थानांतरित कर (Deportation Order) दिया गया। याचिका में उनकी रिहाई और जल्द से जल्द उज्बेकिस्तान भेजने की मांग रखी गई थी।

होटल जांच में सामने आया मामला

मार्च 2026 में तेलीबांधा थाना क्षेत्र के एक होटल में जांच के दौरान दोनों विदेशी युवतियां पुलिस की नजर में आई थीं। जांच के समय अधिकारियों को दस्तावेजों में अनियमितताएं मिली थीं।

जांच में सामने आया कि दिनोरा सफ्युतदिनोवा का वीजा निर्धारित अवधि से काफी पहले समाप्त हो चुका था और वह तय समय से अधिक अवधि तक भारत में रह रही थीं। वहीं फेरूजा सबिरोवा के पास पासपोर्ट और वीजा से जुड़े जरूरी वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए थे।

पुलिस ने दर्ज किया था मामला

दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने के बाद तेलीबांधा पुलिस ने इमिग्रेशन एवं फारेनर्स एक्ट 2025 की धाराओं 3, 21 और 23 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद अप्रैल 2026 में दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की गई थी।

दूतावास ने भी जताई सहमति

सुनवाई के दौरान उज्बेकिस्तान दूतावास की ओर से अदालत में पत्र भी प्रस्तुत (Deportation Order) किया गया। दूतावास ने दोनों महिलाओं को शीघ्र उनके देश भेजने का अनुरोध किया और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में सहयोग का भरोसा दिया।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भी अदालत को बताया गया कि डिपोर्टेशन की प्रक्रिया जारी है और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों महिलाओं को जल्द उज्बेकिस्तान भेज दिया जाएगा।

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