Cyclone Arnab: अर्नब ने छीनी किसानों के चेहरे की मुस्कान

- -खेतों में गिरी पकी फसल, अब नुकसान की भरपाई की चिंता
- -खेत में बिछी महीनों की मेहनत, किसान की आंखों में आंसू
- -अर्नब की बारिश ने धान की पकी फसल को जमीन पर लिटाया
- -खेतों में भरा पानी; कटकर रखी उपज भी भीगी, अब नुकसान की भरपाई की चिंता
- -कवर्धा के किसान जेएल वर्मा ने छत्तीसगढ़ी गीत में सुनाया अपना दर्द
- -रायपुर से सरगुजा और बस्तर तक बारिश का असर, कई जिलों में स्कूल बंद
रायपुर/नवप्रदेश। धान की सुनहरी बालियों को देखकर किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे थे। कुछ ही दिनों में कटाई शुरू होने वाली थी। महीनों की मेहनत घर पहुंचती, लेकिन चक्रवाती तूफान अर्नब (Cyclone Arnab) से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों का पूरा हिसाब बिगाड़ दिया। खेतों में खड़ी पकी फसल जमीन पर बिछ गई है। कई जगह पानी भरने से धान की बालियां कीचड़ में डूब गई हैं, जबकि जिन किसानों ने कटाई कर ली थी, उनकी उपज भी बारिश में भीग गई। अब किसान इस चिंता में हैं कि बची हुई फसल को कैसे समेटें और नुकसान की भरपाई कैसे होगी। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने छत्तीसगढ़ के किसानों के सामने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। पिछले दो दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में हो रही बारिश और तेज हवाओं के कारण धान की तैयार फसल गिर गई है। कहीं खेतों में पानी भर गया है, तो कहीं कटाई के बाद रखी उपज भीग गई। सबसे अधिक चिंता उन किसानों को है, जिनकी फसल पक चुकी है और कटाई शुरू होने वाली थी। बारिश लंबी खिंची तो धान के दानों का रंग बदलने, अंकुरण और फफंद लगने का खतरा बढ़ सकता है।
बलौदाबाजार, बालोद, कबीरधाम, रायगढ़, सरगुजा और बलरामपुर सहित कई जिलों से फसल प्रभावित होने की खबरें हैं। नुकसान का वास्तविक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। मौसम सामान्य (Cyclone Arnab) होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने क्षेत्र में फसल गिरी और कितने किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। फिलहाल किसानों के सामने दोहरी चुनौती है। पहले खेत में खड़ी फसल बचानी है, फिर उसकी कटाई और उपज की गुणवत्ता बनाए रखनी है।
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अर्नब का असर
कवर्धा : गीत में छलका किसान का दर्द
किसान जेएल वर्मा ने अपने खेत में गिरी धान की फसल दिखाते हुए छत्तीसगढ़ी गीत गाया। उनका वीडियो वायरल हो रहा है। बारिश से बर्बाद होती फसल को लेकर किसानों की चिंता इस वीडियो में सामने आई है।
बलौदाबाजार : पकी फसल गिरी, कटाई पर संकट
बलौदाबाजार, भाटापारा, सिमगा, कसडोल और पलारी में लगातार बारिश का असर धान की फसल पर पड़ा है। कई स्थानों पर तैयार फसल जमीन पर गिर गई है। खेतों में नमी और जलभराव से कटाई में देरी की आशंका है।
बालोद : दूसरे दिन भी बारिश, खेतों में पानी
जिले में रुक-रुककर बारिश जारी रही। कई खेतों में धान की बालियां गिर गई हैं। शासकीय और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया। मौसम साफ होने के बाद फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
रायगढ़ : तेज हवाओं से झुकी धान की फसल
पुसौर क्षेत्र में तेज हवाओं के कारण धान की खड़ी फसल झुक गई। बारिश जारी रहने से किसानों को फसल की गुणवत्ता और कटाई प्रभावित होने की चिंता है।
रायपुर : बारिश, गिरे पेड़ और बिजली गुल
बुधवार को राजधानी में तेज बारिश और लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। कई इलाकों में पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की खबरें हैं। गुरुवार को स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित किया गया।
बस्तर : रात में बारिश, दिनभर तेज हवाएं
जगदलपुर सहित बस्तर संभाग में देर रात बारिश हुई। गुरुवार सुबह बारिश थमने के बाद भी तेज हवाएं और घने बादल बने रहे। बस्तर के पांच जिलों नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, बस्तर और दंतेवाड़ा के लिए ऑरेंज अलर्ट की जानकारी सामने आई है।
सरगुजा : पांच जिलों में स्कूल बंद, फसल भीगी
सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में बुधवार से बारिश और तेज हवाओं का असर रहा। पांचों जिलों में एक दिन के लिए स्कूल बंद रखने की जानकारी है। खराब मौसम के कारण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सरगुजा दौरा भी टल गया।
बलरामपुर : कटकर रखी धान की फसल भीगी
खेतों में कटाई के बाद रखी गई धान बारिश में भीग गई। लगातार नमी रहने से दानों के काले पडऩे और फफूंद लगने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों के सामने तीन बड़े संकट
- उत्पादन पर असर: खेतों में गिरी फसल और जलभराव के कारण कटाई मुश्किल होने तथा उपज का नुकसान बढऩे की आशंका है।
- धान की गुणवत्ता: लगातार नमी के कारण दानों का रंग बदलने, अंकुरण, फफूंद और रोग लगने का खतरा बढ़ सकता है।
- समर्थन मूल्य पर बिक्री: दानों में अधिक नमी और गुणवत्ता खराब होने पर किसानों को खरीदी केंद्रों में धान बेचने में परेशानी हो सकती है।
किसान की तीन बड़ी चिंताएं
- पकी फसल का नुकसान : तेज हवाओं से धान की बालियां जमीन पर गिर गईं। जलभराव के कारण कटाई कठिन हो सकती है।
- उपज की गुणवत्ता : ज्यादा नमी रहने से दाने बदरंग होने, अंकुरण और फफूंद लगने का खतरा है।
- बिक्री में परेशानी : दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने पर समर्थन मूल्य पर धान बेचने में दिक्कत आ सकती है।
अब नुकसान के आकलन पर किसानों की नजर
तूफान (Cyclone Arnab) के कारण कितने हेक्टेयर में धान की फसल गिरी है और कितने किसानों को नुकसान हुआ, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। खेतों में पानी और बारिश जारी रहने के कारण वास्तविक स्थिति का आकलन भी प्रभावित है। किसानों को अब मौसम साफ होने और फसल नुकसान की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। इसके बाद प्रशासन की ओर से किए जाने वाले सर्वे और राहत संबंधी निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।
मौसम विभाग की चेतावनी, सतर्क रहने की सलाह
बस्तर संभाग के नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, बस्तर और दंतेवाड़ा के लिए ऑरेंज अलर्ट की जानकारी दी गई है। प्रदेश के अन्य कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी होने का उल्लेख है। सरगुजा संभाग की अलग रिपोर्ट में सूरजपुर, कोरिया और एमसीबी में ऑरेंज तथा सरगुजा और बलरामपुर में येलो अलर्ट बताया गया है। ये अलग-अलग क्षेत्रीय बुलेटिनों के विवरण हैं। बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।



