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Constitution of India 2025 : स्वतंत्रता के बाद भारत सुदृढ़ है तो इसका श्रेय संविधान को : सीजेआइ गवई

देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने कहा है कि यदि भारत अपनी स्वतंत्रता के बाद सुदृढ़ है तो इसका श्रेय उस संविधान (Constitution of India 2025) को जाता है, जिसके निर्माण में डॉ. भीमराव आंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका है। वह सच्चे राष्ट्रवादी थे और उन्होंने देश की एकता संविधान के माध्यम से सुनिश्चित की है। संविधान ही वह शक्ति है जिसने राष्ट्र को शांति और युद्ध के समय एकजुट व सशक्त बनाए रखा है।

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सीजेआइ गवई शनिवार को इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित ‘Constitution and Constitutionalism : The Philosophy of Dr. B.R. Ambedkar’ विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, संविधान देश का ढांचा है, जबकि संविधानवाद उसकी आत्मा। हर पांच वर्ष में सरकार जनता के समक्ष उत्तरदायी होती है। यही प्रक्रिया लोकतंत्र को जीवंत रखती है और नागरिकों को देश की शासन-व्यवस्था में भागीदारी का अधिकार देती है। यह प्रणाली न्यायपालिका को मजबूत, स्वतंत्र और कार्यपालिका या संसद के हस्तक्षेप से मुक्त बनाए रखने में सहायक है। इसीलिए भारत में न्यायपालिका आज भी जनता के विश्वास का प्रतीक है।

सीजेआइ ने कहा कि 26 नवंबर 1949 को संविधान (Constitution of India 2025) को अंगीकृत किया गया था। तब से आज तक अनेक आंतरिक और बाहरी चुनौतियां आईं, किंतु देश मजबूती से खड़ा रहा। पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की हालत सबके सामने है। उन्होंने कोलेजियम प्रणाली पर भी अपनी बात रखी। बोले – कई लोग इसकी आलोचना यह कहते हुए करते हैं कि भारत दुनिया में अकेला ऐसा देश है जहां न्यायाधीश स्वयं न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं, लेकिन यह आरोप सत्य नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्ति की प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकारों, राज्यपाल, कानून मंत्रालय तथा खुफिया विभाग (आइबी) जैसी संस्थाओं की राय और रिपोर्ट ली जाती है। उच्च और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति विशिष्ट प्रणाली के तहत होती है। करीब 40 मिनट अपने संबोधन में सीजेआइ ने केशवानंद भारती मामले के अलावा मेनका गांधी बनाम संघ मामले की भी चर्चा की और संवैधानिक मूल्यों (Constitutional Values India) के प्रति सदैव सजग रहने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए बात समाप्त की।

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रमनाथ ने सीजेआइ के नागपुर से सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा की चर्चा की। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने डॉ. आंबेडकर को “कांस्टीट्यूशन का चीफ आर्किटेक्ट” की संज्ञा दी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति कृष्णमूर्ति को बैचलर आफ लॉ की डिग्री दी गई। जस्टिस कृष्णमुरारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1981 में विधि स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।

शिक्षक मनोयोग से बच्चों के निर्माण में दें योगदान

सुबह प्रधान न्यायाधीश कौशांबी में थे। यहां जस्टिस विक्रमनाथ के बाबा महेश्वरी प्रसाद के नाम पर वर्ष 1966 में स्थापित इंटर कॉलेज के वार्षिकोत्सव में प्रतिभाग किया। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में मनोयोग से अपना योगदान दें। विद्यार्थियों से कहा कि वह अपनी मिट्टी से हमेशा जुड़ाव बनाए रखें। विद्यालय की स्थापना जस्टिस विक्रमनाथ के पिता देवेंद्रनाथ ने कराई थी। उनकी स्मृति में वार्षिकोत्सव हुआ था।

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