Chhattisgarh Tribal Festival : बस्तर पंडुम बना बदलते बस्तर का प्रतीक, संस्कृति से निकली शांति और विकास की नई पहचान

Chhattisgarh Tribal Festival

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7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि बस्तर आज अपनी सांस्कृतिक जड़ों के साथ एक नए आत्मविश्वास के दौर में प्रवेश (Chhattisgarh Tribal Festival) कर चुका है। तीन दिनों तक चले इस विशेष आयोजन में बस्तर की समृद्ध परंपराएं, जनजातीय कला, लोक-संस्कृति और विरासत का भव्य और जीवंत रूप देखने को मिला। मंच से लेकर मैदान तक हर प्रस्तुति में स्थानीय समाज का गर्व, आत्मसम्मान और उम्मीदें साफ झलकती रहीं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आयोजन को बस्तर की नई पहचान का आधार बताते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक उत्सव हमारी विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी परिवारजनों और कलाकारों को हार्दिक बधाई देते हुए इसे जनजातीय समाज के लिए गर्व का क्षण बताया।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि पहले जब बस्तर का नाम लिया (Chhattisgarh Tribal Festival) जाता था, तो माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की छवि उभरकर सामने आती थी। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। अब बस्तर विकास, शांति और स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाला समय बस्तर के लिए शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव से भरा होगा।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरदर्शी सोच और निरंतर मार्गदर्शन के कारण बस्तर आज सांस्कृतिक गौरव और समावेशी विकास का सशक्त प्रतीक बनकर उभर रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि भरोसे, सहभागिता और प्रगति (Chhattisgarh Tribal Festival) का संदेश हैं। ये कार्यक्रम यह साबित करते हैं कि जनजातीय परंपराओं और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाकर बस्तर को नई ऊँचाइयों तक ले जाया जा सकता है। सरकार जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ बस्तर को शांति, समृद्धि और विकास के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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