छत्तीसगढ़

Chhattisgarh High Court : सड़क हादसे के मुआवजे पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, उम्र साबित करने के लिए आधार को नहीं माना भरोसेमंद

रायपुर में सड़क दुर्घटना से जुड़े मुआवजे के मामलों पर आए एक अहम फैसले की कानूनी हलकों में चर्चा (Chhattisgarh High Court) तेज हो गई है। अदालत ने साफ कर दिया है कि हर दस्तावेज हर परिस्थिति में समान महत्व नहीं रखता। खासकर उम्र तय करने के सवाल पर अदालत ने ऐसा संकेत दिया है, जिसका असर भविष्य के कई दावों पर पड़ सकता है।

सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की जिम्मेदारी और दावेदार की उम्र को लेकर उठे सवालों पर भी अदालत ने विस्तार से अपनी राय रखी। फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि मुआवजे से जुड़े मामलों में केवल आधार कार्ड के आधार पर उम्र तय नहीं की जा सकती और बीमा अनुबंध की शुरुआत भी प्रीमियम जमा होने की तारीख से नहीं मानी जाएगी।

आधार कार्ड को उम्र का अंतिम प्रमाण नहीं माना Chhattisgarh High Court

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में दावेदार की उम्र निर्धारित करने के लिए आधार कार्ड को भरोसेमंद दस्तावेज नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि उम्र तय करने के लिए रिकॉर्ड पर उपलब्ध अन्य साक्ष्यों का भी मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने केवल आधार कार्ड के आधार पर दावेदार की उम्र 68 वर्ष मान ली थी। हाईकोर्ट ने इसे उचित नहीं माना और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर उम्र 61 से 65 वर्ष के बीच निर्धारित की।

बीमा प्रीमियम जमा होने से नहीं शुरू होता जोखिम

सुनवाई में वाहन मालिक की ओर से दलील दी गई कि दुर्घटना से पहले ही बीमा प्रीमियम कंपनी के खाते में जमा हो चुका था, इसलिए बीमा कंपनी मुआवजा देने की जिम्मेदार है।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि केवल प्रीमियम जमा होने से बीमा अनुबंध प्रभावी नहीं हो जाता। बीमा कंपनी द्वारा प्रस्ताव स्वीकार कर पॉलिसी जारी किए जाने की तारीख और समय से ही बीमा अनुबंध लागू माना जाएगा और उसी समय से जोखिम की जिम्मेदारी शुरू होती है।

सड़क हादसे से जुड़ी थीं तीन अपीलें Chhattisgarh High Court

यह मामला एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। घायल व्यक्ति का एक पैर काटना पड़ा था। टाटा सूमो के मालिक और चालक ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। दूसरी ओर, दावेदारों ने मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए क्रॉस आपत्तियां भी प्रस्तुत की थीं।

हाईकोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा

सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने वाहन मालिक और चालक की अपीलें खारिज (Chhattisgarh High Court) कर दीं। वहीं दावेदारों की क्रॉस आपत्तियों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए तीनों मामलों में मुआवजा राशि बढ़ाने का आदेश दिया।

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