Chanakya Niti: आलस्य ही मनुष्य का स्वभाव और शत्रु वाला गुण..

chanakya neeti hindi,

chanakya neeti hindi


Chanakya Niti: द्विजातियों ब्राह्मण और क्षत्रीय तथा वैश्य वर्गों का गुरु अर्थात् पूजनीय इष्टदेव अग्नि है। ब्राह्मण सभी वर्गो-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का गुरू है, किन्तु स्त्रियों का गुरु अर्थात् पथ-प्रदर्शक उनका पति होता है।

स्त्रियों के लिए अपने पति को छोड़कर किसी साधू-बाबा अथवा महात्मा को गुरू बनाना नितान्त निषेध है। यही सत्य है कि अतिथि भी सभी का पूजनीय होता है। आलस्य मनुष्य स्वभाव का बहुत बड़ा दुर्गुण है। (Chanakya Niti)

आलस्य के कारण प्राप्त की गई विद्या भी अभ्यास के अभाव में नष्ट हो जाती है। दूसरे के हाथ में गया हुआ धन कभी वापस नहीं आता। बीज अच्छा न हो तो फसल भी अच्छी नहीं होती और थोड़ा बीज डालने से तो खेत भी उजड़ जाते हैं। सेनापति कुशल न हो तो सेना भी नष्ट हो जाती है।

अत: स्पष्ट है कि विद्या के लिये परिश्रम वांछनीय है। (Chanakya Niti) धन वही है, जो अपने अधिकार में है। फसल तब ही अच्छी होगी जब खेत में बीज उत्तम व उचित मात्रा में डाला जायेगा और सेना वही जीतती है जिसका संचालन कुशल सेनापति करता है।

(Chanakya Niti) शील के संरक्षण से कुल (परिवार) का नाम उज्जवल होता है। लगातार अभ्यास करते रहने से विद्या की रक्षा होती है। गुणों के धारण करने से श्रेष्ठता का प्रचार होता है तथा नेत्रों से क्रोध की जानकारी मिल जाती है।

अत: विद्या और अभ्यास का, कुल और शील का, गुण और श्रेष्ठता का तथा कोप और दृष्टि का, चोली-दामन का साथ है। यानी दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *