
संसद के बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधन के साथ हुई। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में बीते वर्ष को भारत की तेज प्रगति और सांस्कृतिक विरासत (Budget Session) के उत्सव का वर्ष बताया। उन्होंने कहा कि संसद के इस सत्र को संबोधित करते हुए उन्हें प्रसन्नता हो रही है और पिछला वर्ष देश के लिए कई ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे देश में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है। नागरिक इस महान प्रेरणा के लिए राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को नमन कर रहे हैं। उन्होंने इस विषय पर संसद में हुई विशेष चर्चा के लिए सांसदों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि देश ने श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती को पूरे सम्मान और राष्ट्रीय भावना के साथ मनाया। इन आयोजनों ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूती दी। राष्ट्रपति ने भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती समारोह का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने पूरे देश को संगीत और एकता के सूत्र में बांधा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार ग्रामीण रोजगार और विकास को गति देने के लिए ‘विकसित भारत-ग्राम कानून’ लेकर आई है। इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का प्रावधान किया गया है। जैसे ही इस घोषणा का उल्लेख हुआ, सत्तापक्ष के सांसदों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया, जबकि विपक्षी सांसदों ने खड़े होकर विरोध करते हुए कानून वापस लेने की मांग की।
सामाजिक न्याय पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और समाज के सभी वर्गों के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति का असर अब देश के हर नागरिक के जीवन में दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में जहां सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ केवल 25 करोड़ लोगों तक सीमित था, वहीं आज लगभग 95 करोड़ भारतीय इन योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2026 के साथ भारत इस सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। बीते 25 वर्षों में देश ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं और पिछले 10–11 वर्षों में हर क्षेत्र में मजबूत नींव रखी गई है। यह समय विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
आंतरिक सुरक्षा पर बोलते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार की नीतियों के चलते माओवादी आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई हुई है। उन्होंने बताया कि जहां कभी 126 जिले माओवादी हिंसा से प्रभावित थे, आज यह समस्या केवल 8 जिलों तक सिमट गई है। बीते एक वर्ष में लगभग 2000 माओवादी सरेंडर कर चुके हैं और लाखों नागरिकों के जीवन में शांति लौटी है। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब देश से माओवादी आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति के संसद पहुंचने पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति को संसद परिसर में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।



