संपादकीय

संपादकीय: दुनिया में गहराता तेल संकट

Editorial: अमेरिका और इजराइल जिस तरह ईरान पर लगातार हमले तेज कर रहे हैं और जवाबी कार्यवाही में ईरान भी इजराइल तथा अमेरिका परस्त खाड़ी देशों पर बम बरसा रहा है। उससे यह जंग लंबी जाने की संभावना बलवति हो गई है। इस जंग के चलते दुनिया में तेल संकट गहराने लगा है। पड़ौसी देश पाकिस्तान में तो पेट्राल और डीजल के दाम आसमान छूने लगे हैं जिससे वहां हाहाकार मच गया है। फिल्हाल भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं लेकिन घरेलू गैस की कीमत में प्रति सिलेन्डर 60 रूपये की तथा कमर्शियल गैस सिलेन्डर में 115 रूपये की वृद्धि हो गई है जिससे आम आदमी का घरेलू बजट गड़बडा गया है।

यदि यह युद्ध लंबा चला तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढऩा तय है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत सौ डॉलर पार कर गई है और इसके 200 डॉलर तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यही नहीं बल्कि उर्वरकों के दाम भी बढ़ सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो निश्चित रूप से दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी और उनके लिए गेहूं के साथ घून पीसने वाली कहावत चरितार्थ हो जाएगी। गौरतलब है कि इस जंग के चलते तेल उत्पादक खाड़ी देशों में तेल के प्लांटों को ही ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है।

इजराइल ने तो ईरान के कई तेल टीपों पर बमबारी कर दी जिसे लेकर अमेरिका इजराइल के बीच ही मतभेद पैदा हो गये हैं। तेल डीपों में आग लगने से अमेरिका की चिंंता बढ़ गई है। जबकि इजराइल का कहना है कि उसने उन तले डीपों को इसलिए निशाना बनाया है क्योंकि उनका इस्तेमाल ईरान मिसाल लांचर्स में ईंधन भरने के लिए करता था। कुल मिलाकर तेल प्लांटों और डिपों को बमबारी का निशाना बनाये जाने से दुनिया पर तेल संकट और बढ़ सकता है जिससे कई देशों में मंहगाई बम फूटेगा और इसका गंभीर दुसपरिणाम उन करोंड़ो निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ेगा जिनका इस जंग से कोई लेना देना नहीं है।

ऊपर से डोनाल्ड ट्रंप ने यह बयान देकर जले पर नमक छिड़कने का काम किया है कि जंग की थोड़ी बहुत कीमत तो सबको चुकानी पड़ती है। डोनाल्ड ट्रंप बेशक इसकी कीमत चुकाएं लेकिन उनकी सनक के चलते दुनिया के अन्य देश भला क्यों इसके दुसपरिणाम भोगेंगे।

बहरहाल जहां तक भारत की बात है तो इसके पास अभी एक माह तक का पर्याप्त तेल भंडार है और रूस से भी कच्चे तेल की आपूर्ति यथावत् जारी है इसलिए फिल्हाल भारत को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है लेकिन यदि यह जंग रूस और यूक्रेन की जंग की तरह ही लंबी चली तो इसके दुष्प्रभाव से भारत भी अछुता नहीं रहेगा और यहां भी पेट्रोल डीजल तथा रसोई गैस के दामों में आग लग सकती है और त्रहि त्राहि मच सकती है।

इस जंग को लेकर भारत की संसद में भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है और बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन ही विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सदन की कार्यवाही ठप कर दी थी। इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा और राज्यसभा में बयान देकर देशवासियों को आस्वस्थ किया है कि भारत स्थिति पर नजर रहे हुए है और एहतियाती कदम उठा रहा है। वैसे तो बेहतर यही होगा कि यह जंग जल्द खत्म हो।

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