Bilaspur Highcourt News: दहेज प्रताड़ना का झूठा आरोप लगाना, मानसिक क्रूरता
Bilaspur Highcourt News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि पत्नी की ओर से पति के खिलाफ लगाया गया दहेज प्रताड़ना का झूठा आरोप आपराधिक आरोप, जिसमें पति अंततः बरी हो गया, परिस्थितियों के आधार पर मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। कोर्ट ने पति की अपील स्वीकार करते हुए जिला न्यायालय के तलाक की याचिका खारिज करने के आदेश को निरस्त कर दिया और विवाह विच्छेद की डिक्री प्रदान की। मामले के अनुसार विवेक अग्रवाल और सरिता अग्रवाल का विवाह 12 दिसंबर 2014 को इटावा, उत्तर प्रदेश में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। 18 दिसंबर 2015 को उनके यहां पुत्र देवांग का जन्म हुआ। पति का आरोप था कि, विवाह के बाद पत्नी अक्सर उससे और परिवार के सदस्यों से विवाद करती, गाली-गलौज और मारपीट करती तथा उसकी वृद्ध मां से अलग रहने के लिए दबाव डालती थी। कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि, पति या पत्नी द्वारा अलग घर में रहने की इच्छा
जताना अपने आप में क्रूरता नहीं है। हालांकि, इस मामले के समग्र तथ्यों में पत्नी के लगातार अलग रहने के दबाव, वैवाहिक विवाद, आपराधिक प्रकरण और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने माना कि पत्नी का व्यवहार पति के लिए मानसिक रूप से परेशान करने वाला था और वैवाहिक संबंध जारी रखना उसके लिए कठिन हो गया था। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने अपील स्वीकार करते हुए जिला जज का आदेश निरस्त कर दिया और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत 12 दिसंबर 2014 को हुआ विवाह तलाक की डिक्री से समाप्त करने का आदेश दिया।
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