छत्तीसगढ़

Bilaspur High Court : गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित, हाई कोर्ट ने 24 अप्रैल तक सभी परिणामी लाभ देने का दिया निर्देश

गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितिकरण से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश (Bilaspur High Court) जारी किया है। अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट के समक्ष 16 फरवरी 2026 का आदेश प्रस्तुत कर बताया कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 26 अगस्त 2008 से नियमित कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के इस जवाब पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि नियमित किए गए कर्मचारियों को उनके सभी परिणामी लाभ 24 अप्रैल 2026 तक प्रदान किए जाएं।

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दरअसल, गुरुघासीदास विश्वविद्यालय में वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी 22 अगस्त 2008 के आदेश के आधार पर तत्कालीन कुलपति प्रो. एलएम मालवीय ने 26 अगस्त 2008 को नियमित (Bilaspur High Court) कर दिया था। इससे पहले विश्वविद्यालय कार्य परिषद ने 22 जुलाई 2008 को नियमितिकरण का प्रस्ताव पारित किया था और राज्य शासन ने भी 5 मार्च 2008 को तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को नियमित करने के लिए सर्कुलर जारी किया था।

इसके बाद 15 जनवरी 2009 को विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने और केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम लागू होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मार्च 2009 में पूर्व नियमितिकरण आदेश को निरस्त कर दिया और कर्मचारियों को पुनः दैनिक वेतनभोगी के रूप में वेतन देने का निर्णय (Bilaspur High Court) लिया। इस निर्णय को चुनौती देते हुए मो. हारून, मेलाराम और अन्य कर्मचारियों ने अधिवक्ता दीपाली पाण्डेय के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि कर्मचारी लंबे समय से सेवा दे रहे हैं और उनका नियमितिकरण रिक्त पदों के आधार पर विधिसम्मत तरीके से किया गया था। कोर्ट ने कर्मचारियों को नियमित करने और सभी सेवा लाभ देने का आदेश दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, लेकिन वहां याचिका खारिज हो गई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) और समीक्षा याचिका दायर की, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया।

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इसके बावजूद कर्मचारियों को पूर्ण सेवा लाभ नहीं मिलने पर धन्नू पांडेय और अन्य कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर की। इस मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच में हुई, जहां विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारियों को पिछली तिथि से नियमित कर दिया गया है और परिणामी लाभ देने के लिए यूजीसी तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से परामर्श लिया (Bilaspur High Court) जा रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि सभी संबंधित कर्मचारियों को नियमितिकरण से जुड़े बकाया और अन्य परिणामी लाभ 24 अप्रैल 2026 तक प्रदान किए जाएं।

यह फैसला गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से नियमितिकरण के बावजूद उन्हें पूर्ण सेवा लाभ नहीं मिल पाए थे। हाई कोर्ट के इस निर्देश से अब कर्मचारियों को वेतन, वरिष्ठता और अन्य सेवा संबंधी लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

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