अमित शाह ने पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर ‘बॉर्डर मिशन’ की शुरुआत की है। इस मिशन का पहला पड़ाव राजस्थान का बीकानेर बना, जहां से गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा की जमीनी समीक्षा शुरू की। माना जा रहा है कि यह दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की नई “स्मार्ट बॉर्डर” रणनीति का अहम हिस्सा है।
बीकानेर से शुरुआत क्यों अहम मानी जा रही?
राजस्थान की पाकिस्तान से लगने वाली करीब 1070 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील मानी जाती रही है। सीमा पार से ड्रग्स, हथियारों और जाली नोटों की तस्करी के मामलों ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में गृह मंत्री द्वारा मिशन की शुरुआत बीकानेर से करना रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमित शाह 26 मई को बीकानेर के सांचू बॉर्डर पोस्ट पहुंचे, जहां उन्होंने बीएसएफ जवानों से मुलाकात की और सीमा सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने आधुनिक ड्रोन तकनीक, निगरानी सिस्टम और सीमा सुरक्षा में इस्तेमाल हो रहे उपकरणों का निरीक्षण भी किया।
जवानों से संवाद और नई महिला बैरकों का लोकार्पण
गृह मंत्री ने सीमा चौकियों पर बनाई गई 14 नई महिला बैरकों का ई-लोकार्पण किया। इसे सीमा क्षेत्रों में महिला जवानों की बढ़ती भूमिका और बेहतर सुविधाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल भी मौजूद रहे।
अमित शाह ने बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 1096 किलोमीटर लंबी लिटरल और 520 किलोमीटर लंबी एक्ससीएल रोड का निर्माण कर रही है, जिससे जवानों की आवाजाही और कनेक्टिविटी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि अब सीमा सुरक्षा बलों को पारंपरिक सुरक्षा मॉडल से आगे बढ़कर नई तकनीकों के साथ काम करना होगा।
1965 युद्ध से जुड़ी है सांचू पोस्ट की ऐतिहासिक पहचान
सांचू पोस्ट का ऐतिहासिक महत्व भी इस दौरे को खास बनाता है। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने इस चौकी पर कब्जे की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों ने बहादुरी दिखाते हुए दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। यही वजह है कि यह पोस्ट सामरिक और भावनात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अब भुज, त्रिपुरा और बंगाल पर फोकस
बीकानेर दौरे के बाद अमित शाह 29 मई को गुजरात के भुज जाएंगे, जहां वह संवेदनशील ‘हरामी नाला’ क्षेत्र का दौरा करेंगे। इसके बाद जून में त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में भी सुरक्षा समीक्षा की जाएगी।
केंद्र सरकार अब सीमा सुरक्षा के लिए ड्रोन निगरानी, तकनीकी सर्विलांस, आधुनिक फेंसिंग और मजबूत सुरक्षा ग्रिड पर तेजी से काम कर रही है। इसे केवल सुरक्षा अभियान नहीं बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की व्यापक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक और सामरिक दोनों दृष्टि से अहम मिशन
विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में सीमा सुरक्षा लंबे समय से बड़ा राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दा रही है। ऐसे में अमित शाह का खुद बॉर्डर पोस्ट तक पहुंचकर समीक्षा करना यह संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के पक्ष में नहीं है।
