संसद के मानसून सत्र में सरकार ने दो अहम विधेयकों को पारित कराने के बाद अब सबकी नजर उन प्रस्तावों पर टिक (Delimitation Bill) गई है, जिनका असर देश की राजनीति पर दूरगामी माना जा रहा है। परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है और दोनों सदनों के भीतर संख्या बल पर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
संसद सत्र के दूसरे सप्ताह में सरकार एंटी पेपर लीक विधेयक और वंदे मातरम विधेयक को पारित कराने में सफल रही। अब माना जा रहा है कि अगले चरण में सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ा सकती है। हालांकि इन दोनों के लिए संविधान संशोधन की जरूरत होने से दो तिहाई बहुमत सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
संविधान संशोधन के लिए चाहिए विशेष बहुमत Delimitation Bill
परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत आवश्यक है। मौजूदा स्थिति में लोकसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 540 मानी जा रही है, ऐसे में विधेयक पारित कराने के लिए कम से कम 360 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा।
सरकार के पास कितना है समर्थन
मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के अनुसार एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों और शिवसेना के कुछ सांसदों के समर्थन के बाद यह संख्या लगभग 319 तक पहुंचती है। वाईएसआरसीपी और एक निर्दलीय सांसद का समर्थन जोड़ने पर सरकार के पक्ष में करीब 324 सांसद होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
अभी भी बहुमत के आंकड़े से दूर Delimitation Bill
इन आंकड़ों के आधार पर सरकार अभी भी दो तिहाई बहुमत के लिए जरूरी संख्या से पीछे दिखाई देती है। ऐसे में अन्य दलों के समर्थन के बिना संविधान संशोधन संबंधी विधेयकों को पारित कराना आसान नहीं माना जा रहा है।
अगले सप्ताह पर टिकी नजर
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलना है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में यह साफ हो सकता है कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक सदन में पेश (Delimitation Bill) करती है या फिर पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित होने तक इंतजार करती है। फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
