खबरों की मरम्मत: सुनना और सुनाना, कारपोरेट वार की चिन्ता, तो क्या अफसरो को निपटाएगा केचुआ

सुनना और सुनाना
आखिर जबानी तौर पर बेलगाम कर्मचारियों की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंच ही गई। सीएम साय ने अति होशियार कर्मचारियों को समझा दिया है कि आपको प्रवचन देने की तनखा नहीं दी जा रही है जनता का दुखड़ा सुनने और उसके निदान के लिए रखा गया है। तो जनता की सुने, जनता को सुनाए नहीं। गौरतलब है कि हमने पिछले सप्ताह इसी कालम में सीएम साय के सख्त निर्देशों के बारे में बता ही दिया था कि जो जिस भाषा में समझ सकता है उसे समझा दिया जाए कि सुशासन तिहार से पहले सभी जिम्मेदार अफसर पेंडेसी निपटा ले नहीं तो निपटने तैयार रहे। और ठीक तिहार शुरू होने से के दिन सीएम का अफसरों के लिए फरमान आता है कि जनता की सुने, सुनाए नहीं।
भस्मासुर या फिर बूमरेंग की गति
हे सोशल मीडिया के शूरवीरों, हे वाट्सप यूनिवर्सिटी के रणबाकुरों, हे आर्टिफिशियल इन्टलीजेन्सी के अकलमन्दों, और हे आभासी दुनिया के एलियनों, अपने अधकचरे ज्ञान से लाइक, कमेन्ट्स की अतृप्त भूख के लिए कम से कम मातृत्व और ममता का तमाशा तो मत बनाओं। अपराधिक लापरवाही के फलस्वरूप जबलपुर के बरगी डेम क्रूज हादसे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफार्मो पर एआईजनित तैरती तस्वीरे और विडियों कोई सूचना नही दे रहे है बल्कि ये पेनिक क्रिएट कर रहे है। एआई से किए जा रहे इस डिजिटल अपराधबोध से ग्रस्त होने के बजाय हल्कट दर्जे का थिंकटैंक इसे महिमा मंडित कर रहा हैं। अगर कोई इको सिस्टम इसे कमांड दे भी रहा हो तो बूमरेंग या भस्मासुर की गति प्राप्ति प्राप्त हो सकती है। हाल ही में छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री के निजी जीवन पर बने वीडियों ने राजनीतिक और सामाजिक वातावरण खराब कर दिया हैं। इन सबसे बचने की जरूरत हैं।
कारपोरेट वार की चिन्ता
वेदान्ता हादसे ने अलग-अलग स्तर पर खौफ पैदा कर दिया है। मालिक अनिल अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होते ही कांग्रेस से भाजपा में गए उद्योगपति सांसद नवीन जिन्दल का अग्रवाल समर्थित बयान छत्तीसगढ़ के छोटे बड़े उद्योगपतियों के बीच संशय के कुछ ऐसे सवाल छोड़ गया कि यदि ये कारपोरेट वार आगे बढ़ा तो राज्य के छोटे मोटे उद्योग अस्तित्व की लड़ाई लड़ते दिखेंगे। दरअसल स्टेनलेस स्टील के सेगमेन्ट में एकछत्र राज करने वाले जिन्दल को अपने नवोदित राजनीतिक बाड़े में एक नया बिजनेस प्लेयर पैदा होते दिख रहा हैं ऐसे में यदि तेवर न दिखाए तो उन्हे भी निकट भविष्य में चुनौतियों का सामना करने पड़ सकता हंै। उद्योग और राजनीतिक गलियारा वेदान्ता और अडानी गु्रप के जेपी एसोसिएट को लेकर औद्योगिक और न्यायिक विवाद से वाकिफ है सो चिन्ता भी स्वाभाविक है।
अब कार्मिक खौफ भी
वेदान्ता में जिन कारणों से हादसे मे 25 लोगों की जान गई वहीं कारण रायपुर के सिलतरा इंडस्ट्रीयल एरिया में नीको जायसवाल की पांच यूनिटों में से तीन में बरकरार है। इसमें से तीन यूनिट के बायलर के सेफ्टी वाल्व काम ही नहीं कर रहे हैं। रनिंग कांडीशन में बायलर सडनली टरबाइन ट्रीप होने पर एक्सेस प्रेशर निकालने के लिए स्टार्टप वेन्ट का उपयोग होता है यदि स्टार्टप वेन्ट काम न करे तो बायलर ब्लास्ट होता है। कमोबेश यही हाल इन उद्योंगो में है लेकिन दो तरफा कार्मिक खौफ है। शिकायत करो तो नौकरी से जाओ और नही करो तो मौत को पाओं। हो सकता औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अफसर इस कालम को पढ़कर जायसवाल नीको के अलावा उन सारे उद्योगो की जांच कर ले जहा इस तरह के खतरे मुंह बाए खड़े है।
तो क्या अफसरो को निपटाएगा केचुआ
खादी ग्रामोद्योग द्वारा साड़ी खरीदी का मामला अभी ठंडा भी नही पड़ा कि हार्टिकल्चर अफसरों का का हार्ट पसीज गया और केचुआ खरीदने का प्लान बना डाला। दो हजार रूपए का सामान 16 हजार में खरीदने का ये कारनामा ईडी की भेट चढ़ चुके एक पुराने खांटी व्यापारी के इशारे पर किया गया। एक ही मालिक की तीन कम्पनियों का रिंग बनाकर खेले गए इस खेल का खुलासा होते ही अफसरों की घिज्घी बंध गई है। जांच शुरू हो चुकी है और अफसर एक दूसरे पर तंज कस रहे है कि ये केचुआ अब निपटाएगा।
शॉपिंग मॉल से मिलने वाले माल का असर
वन नेशन वन इलेक्शन वन कांस्टीट्यूशन वन टैक्स वगैरह वगैरह का राग भले ही आलापा जा रहा हो। लेकिन सच ये है कि राजधानी रायपुर से लेकर अन्य शहरों में छोटे-बड़े मामलों में ‘वन स्टेट वन रुल’ का पालन तक नहीं हो रहा है। उपभोक्ता फोरम के आदेश पर राजधानी के एक मॉल में पार्किंग शुल्क की वसूली बंद हो गई लेकिन, बाकी मॉल में पार्किंग की वसूली बेरोकटोक जारी है। प्रदेश के अन्य शहरों में भी बाकायदा पार्किंग की वसूली हो रही है। सवाल किये जा रहे हैं कि क्या अन्य शॉपिंग मॉल में शुल्क की वसूली रोकने के लिये उपभोक्ता फोरम के अलग-अलग आदेश जारी करना होगा। सरकारी अफसरों को उपभोक्ता फोरम के एक फैसले के आधार पर पूरे प्रदेश में वन स्टेट वन रुल का नियम लागू करने से किसने रोका है। जानकार कह रहे हैं कि मॉल से मिलने वाले ‘माल’ के कारण अफसर पार्किंग शुल्क पर रोक लगाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे।
छत्तीसगढ़ में नए-नए गुल खिला रहे तोते
अभी कुछ दिन पहले जगदलपुर में साहब का तोता पेड़ की ऊंची टहनी पर बैठे होम गार्ड के जिला सेनानी के तोते को नीचे उतारने दमकल विभाग की टीम लगा दी गई। अब बस्तर इलाके में तोतेबाजी का नया एपिसोड हो गया। जंगल से तोता पकड़कर बेचने वालों ने भरे बाजार में रेंजर और वन कर्मियों की पिटाई कर दी। जगदलपुर में पहाड़ी मैना की बिक्री की खबर मिलने पर जब जंगल विभाग के अफसर मौके पर पहुंचे तो तोतेबाजों ने फ्लाइंग स्क्वाड के इंचार्ज और रेंजर सहित अन्य कर्मियों को खंभे से बांधकर धुना। तोतेबाजों ने फॉरेस्ट अफसरों के दिमाग के तोते उड़ा दिये। जंगल में मंगल मनाने वाले फारेस्ट विभाग के अफसर अब पुलिस विभाग की शरण में गए हैं। तोतेबाजों को पकड़ लिया गया है लेकिन अब देखना ये है कि तोते अब क्या नया गुल खिलाने वाले हैं।
रेलवे के फरमान से परेशान टीटीई सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों की शरण में
रेलवे ने फरमान जारी कर दिया है कि अब टीटीई मैनुअल रसीद नहीं काट पाएंगे। बिना टिकट यात्रा या ट्रेन में खाली बर्थ पर रिजर्वेशन कराने, डिफ़ेंस जैसे मामलों में अब टीटीई को आनलाइन ईएफटी सिस्टम लागू किया जा रहा है। इससे लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड आनलाइन होगा। पारदर्शिता बढ़ाने और करप्शन रोकने की दिशा में इसे बड़ा कदम कहा रहा है। लेकिन इस फरमान से रेलवे के करप्ट टीटीई की जमात परेशान हैं। ईएफटी से कई घंटे तक ट्रेन की ड्यूटी के दौरान बीच-बीच में मैनुअल रसीद काटने पर टीटीई को अब ‘चढ़ौती’ नहीं मिलेगी। लिहाजा इसकी काट तलाशने चढ़ौती मास्टर टीटीई ने कम्प्यूटर विशेषज्ञों की सलाह ली है। एक्सपर्ट ने तत्काल सलाह दे दी। यात्रा के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं मिलने, नेटवर्क कमजोर होने, यात्रियों का मोबाइल नंबर गलत दर्ज करने जैसी कई सलाह दी गई है, जिससे टीटीई को पहले की तुलना में 50 प्रतिशत तक कैलोरी मिलती रहेगी। काले कोट वाले टीटीई इस सलाह से काफी खुश हैं। पूरी न सही ज् आधी कैलोरी तो मिलेगी।



