छत्तीसगढ़

Balco Chimney Collapse 2009 : 17 साल बाद गहराया रहस्य, होटल के कमरे में गवाह को कैद कर रची जा रही थी बरी होने की साजिश

छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे भीषण औद्योगिक हादसों में शुमार ‘2009 बालको चिमनी कांड’ एक बार फिर सुर्खियों (Balco Chimney Collapse 2009) में है। 40 मजदूरों की मौत के इस मामले में न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों के सामने एक चौंकाने वाला सच आया है।

कोरबा पुलिस ने शहर के एक नामी होटल में छापा मारकर उस बड़ी साजिश का भंडाफोड़ किया है, जिसके जरिए मुख्य गवाहों को ‘खरीदने’ या ‘सिखाने’ की कोशिश की जा रही थी। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि रसूखदार कंपनियां कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए किस हद तक जा सकती हैं।

होटल ग्रैंड गोविंदा में आधी रात का एक्शन (Balco Chimney Collapse 2009)

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि चिमनी हादसे की जांच को प्रभावित करने के लिए मुख्य गवाहों पर दबाव बनाया जा रहा है। एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर एसएसपी लखन पटले की टीम ने जब होटल ग्रैंड गोविंदा के कमरा नंबर 202 में दबिश दी, तो वहां का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए।

कमरे के भीतर केस का मुख्य गवाह पृथ्वीनाथ सिंह, आरोपी सगामसेट्टी व्यंकटेश के साथ मौजूद था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि यह कमरा GDCL कंपनी के नाम पर बुक कराया गया था, जो इस हादसे में मुख्य आरोपी कंपनियों में से एक है।

व्हाट्सएप पर ‘स्क्रिप्ट’ और बयानों की डीलिंग

पुलिसिया जांच में यह बात सामने आई है कि गवाह को अदालत में क्या बोलना (Balco Chimney Collapse 2009) है, इसकी पूरी स्क्रिप्ट पहले ही तैयार कर ली गई थी। आरोपी व्यंकटेश के मोबाइल की जांच में चौंकाने वाले डिजिटल सबूत मिले हैं।

गवाह के बयानों की एक कॉपी व्हाट्सएप के जरिए उसके परिजनों को भेजी गई थी, ताकि कोर्ट में गवाही के दौरान कोई गलती न हो। पुलिस ने मौके से कई ऐसे दस्तावेज और मोबाइल चैट बरामद किए हैं, जो सीधे तौर पर जीडीसीएल और सेपको कंपनी को बचाने की इस गहरी साजिश की ओर इशारा करते हैं।

हाईकोर्ट की सख्ती और न्याय की नई उम्मीद

गौरतलब है कि बिलासपुर हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद इस मामले की सुनवाई के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय (Balco Chimney Collapse 2009) की गई है। संभवतः इसी दबाव के चलते कंपनियां गवाहों को प्रभावित करने का आखिरी दांव खेल रही थीं।

कोर्ट में जब लोक अभियोजक ने इस घटना का जिक्र किया, तो बचाव पक्ष के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। फिलहाल कोर्ट ने गवाही के लिए अतिरिक्त समय दिया है और पुलिस इस मामले में शामिल अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। 17 साल बाद हुए इस खुलासे ने उन परिवारों के जख्मों को फिर हरा कर दिया है, जिन्होंने अपनों को खोया था, लेकिन अब उन्हें उम्मीद है कि साजिशकर्ता सलाखों के पीछे होंगे।

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