छत्तीसगढ़

Auto Mutation : जमीन के काम में अब नहीं होगी दौड़-धूप! छत्तीसगढ़ में आटो म्यूटेशन-आटो डायवर्सन से 99.95% रिकार्ड सफलता

छत्तीसगढ़ में जमीन के नामांतरण (Auto Mutation) और भूमि उपयोग परिवर्तन (Auto Diversion) की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल हो गई है। राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने तकनीक आधारित व्यवस्था लागू कर जमीन संबंधी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने या दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। विभाग के अनुसार राज्य में 99.95 प्रतिशत आटो म्यूटेशन (Auto Mutation) और 83.71 प्रतिशत आटो डायवर्सन (Auto Diversion) प्रकरणों का सफल निराकरण किया जा चुका है।

1.40 लाख से अधिक मामलों में स्वत: हुआ नामांतरण

राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक राज्य में 1 लाख 40 हजार 607 पंजीकृत विलेखों में से 1 लाख 40 हजार 536 मामलों में सफलतापूर्वक स्वत: नामांतरण किया गया है। केवल 71 प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं। इस उपलब्धि के साथ विभाग ने 99.95 प्रतिशत सफलता दर दर्ज करते हुए नया रिकार्ड बनाया है।

आटो डायवर्सन से तेज हुई भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया

भूमि उपयोग परिवर्तन यानी आटो डायवर्सन (Auto Diversion) व्यवस्था के तहत अब तक 5 हजार 661 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 4 हजार 739 मामलों का निराकरण किया जा चुका है। इस तरह विभाग ने 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण किया है। वर्तमान में लंबित 922 मामलों में अधिकांश में दस्तावेज अधूरे होना, चालान संबंधी तकनीकी कारण या नगर तथा ग्राम निवेश के मास्टर प्लान से अलग उपयोग प्रस्तावित होना प्रमुख वजह है।

रजिस्ट्री के बाद नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर

पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग आवेदन, दस्तावेज सत्यापन और तहसील कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते थे। नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वत: पूरी हो रही है। इससे समय और धन की बचत होने के साथ पारदर्शिता भी बढ़ी है तथा जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है।

एनआईसी का लाक सिस्टम करेगा निगरानी

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने इस व्यवस्था के लिए विशेष तकनीकी लाक सिस्टम विकसित किया है। यदि किसी संपत्ति का पुराना आटो म्यूटेशन (Auto Mutation) लंबित रहेगा तो उसी संपत्ति की अगली रजिस्ट्री तब तक नहीं हो सकेगी, जब तक लंबित नामांतरण का निराकरण नहीं हो जाता। इससे राजस्व अमले की जवाबदेही भी तय होगी।

कोरिया पहले, धमतरी टाप-5 में शामिल

आटो डायवर्सन के जिला स्तरीय प्रदर्शन में कोरिया ने 100 प्रतिशत सफलता के साथ पहला स्थान हासिल किया है। कोरबा 98.46 प्रतिशत, मुंगेली 94.16 प्रतिशत, बालोद 93.72 प्रतिशत और धमतरी 92.73 प्रतिशत सफलता दर के साथ राज्य के टाप-5 जिलों में शामिल रहे हैं। विभाग का मानना है कि जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से सेवाओं की गुणवत्ता और बेहतर होगी।

नए डिजिटल मॉड्यूल से और आसान होगी सेवाएं

राजस्व विभाग अब एनजीडीआरएस (NGDRS) इंटीग्रेशन, मल्टीपल खसरा मॉड्यूल और रिकवरी मॉड्यूल जैसे नए डिजिटल सिस्टम भी लागू कर रहा है। इनके माध्यम से एक आवेदन में कई खसरों का चयन, स्वत: शुल्क गणना, ई-चालान और लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। विभाग का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक राजस्व सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है।

दिसंबर 2026 तक और मजबूत होगा डिजिटल सिस्टम

राजस्व विभाग के रोडमैप के अनुसार दिसंबर 2026 तक सैटेलाइट और ड्रोन मैपिंग, टीएनसीपी से एनओसी लिंकिंग तथा भू-अभिलेख पोर्टल के व्यापक अपग्रेडेशन का कार्य भी पूरा किया जाएगा। इससे किसानों, गृहस्वामियों, व्यापारियों और निवेशकों को जमीन संबंधी सेवाएं पहले से अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक तरीके से मिल सकेंगी।

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