Agriculture Tips : गेहूं की फसल में अब भी है समय, अपनाएं ये उपाय और बढ़ाएं मुनाफा
Agriculture Tips
देश के ज्यादातर किसान भाई पीढ़ियों से गेहूं की खेती (Agriculture Tips) उसी पारंपरिक तरीके से करते आ रहे हैं, जो उन्होंने अपने बुजुर्गों से सीखा है। इस पद्धति से खेती तो हो जाती है, लेकिन कई बार मेहनत और लागत के अनुपात में पैदावार संतोषजनक नहीं मिल पाती।
बढ़ती उत्पादन लागत, महंगी खाद, पानी की कमी और मजदूरी के बढ़ते खर्च के कारण किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे हालात में जरूरी हो गया है कि खेती के तौर-तरीकों में थोड़े लेकिन असरदार बदलाव किए जाएं, ताकि कम खर्च में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा हासिल किया जा सके।
गेहूं (Agriculture Tips) की फसल में सही समय पर खाद प्रबंधन और शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। अक्सर देखा गया है कि किसान भाई इन दोनों पहलुओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका सीधा असर फसल की बढ़वार और दाने भरने की क्षमता पर पड़ता है। नतीजतन फसल कमजोर रह जाती है और कुल पैदावार में गिरावट आ जाती है।
यदि वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित पोषण और समय पर खरपतवार नियंत्रण किया जाए, तो गेहूं की फसल मजबूत बनती है और बालियों में दाने भी अच्छे और भरपूर बनते हैं। थोड़ी-सी समझदारी और सही जानकारी अपनाकर किसान अपनी गेहूं की खेती से बेहतर उत्पादन के साथ अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
गेहूं की फसल की अच्छी बढ़वार और बेहतर दाना भराव के लिए संतुलित पोषण अत्यंत आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रति हेक्टेयर लगभग 60 किलोग्राम नाइट्रोजन और 46 किलोग्राम फॉस्फोरस का प्रयोग लाभकारी माना जाता है। इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं, पौधे स्वस्थ रहते हैं और बालियों में दानों का विकास बेहतर होता है।
नाइट्रोजन और फॉस्फोरस देने का सही तरीका
नाइट्रोजन खाद को एक साथ देने की बजाय दो या तीन भागों में देना अधिक प्रभावी रहता है। इसकी पहली मात्रा बुआई के समय, दूसरी पहली सिंचाई के बाद और तीसरी मात्रा बालियां निकलने की अवस्था में दी जा सकती है। वहीं फॉस्फोरस की पूरी मात्रा बुआई के समय ही खेत में डाल देना चाहिए, ताकि पौधों को शुरुआती अवस्था में पर्याप्त पोषण मिल सके और उनकी वृद्धि अच्छी हो।
खरपतवार से होने वाला नुकसान
गेहूं की फसल में खरपतवार शुरुआती दिनों में सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। ये खरपतवार पोषक तत्वों, पानी और स्थान के लिए मुख्य फसल से प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे फसल की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन घट सकता है। इसलिए समय रहते खरपतवार नियंत्रण करना बेहद जरूरी माना जाता है।
प्री-इमर्जेंस दवा का महत्व
खरपतवार नियंत्रण के लिए प्री-इमर्जेंस दवाओं को सबसे कारगर माना जाता है। इस विधि में फसल के अंकुरण से पहले ही खरपतवार को उगने से रोका जाता है। गेहूं की फसल के लिए पेनिडमेथिलिन नामक दवा प्रभावी मानी जाती है, जो शुरुआती अवस्था में खरपतवार पर नियंत्रण करने में मदद करती है।
पेनिडमेथिलिन का सही प्रयोग
किसानों को बुआई के पांच दिन के भीतर पेनिडमेथिलिन का छिड़काव करना चाहिए। इसकी अनुशंसित मात्रा लगभग 1.25 लीटर प्रति एकड़ होती है, जिसे पर्याप्त पानी में घोलकर खेत में समान रूप से छिड़कना चाहिए। छिड़काव के समय खेत में पर्याप्त नमी होना बेहद जरूरी है, ताकि दवा का प्रभाव सही ढंग से हो सके।
(Agriculture Tips) सावधानियां और फायदे
दवा का छिड़काव करते समय हवा की गति कम होनी चाहिए और निर्धारित मात्रा से अधिक दवा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। संतुलित खाद प्रबंधन और समय पर खरपतवार नियंत्रण अपनाने से गेहूं की फसल स्वस्थ रहती है, उत्पादन में बढ़ोतरी होती है और अंततः किसानों को बेहतर मुनाफा प्राप्त होता है।
