Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट में अब बढ़ेगी ताकत, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नए न्यायाधीशों की राह साफ

देश की सबसे बड़ी अदालत से जुड़ी बड़ी खबर सामने आने के बाद कानूनी गलियारों में हलचल (Supreme Court) तेज हो गई है। रविवार को न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों के बीच पूरे दिन इस फैसले की चर्चा होती रही। लंबे समय से लंबित मामलों और बढ़ते बोझ को लेकर जो चिंता जताई जा रही थी, अब उसे कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
दिल्ली में वकीलों और कानून विशेषज्ञों के बीच भी इस फैसले को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों का कहना है कि अदालतों में लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना जरूरी हो गया था। माना जा रहा है कि इससे आने वाले समय में सुनवाई प्रक्रिया को गति मिल सकती है।
राष्ट्रपति ने दी मंजूरी : Supreme Court
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के फैसले को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब सर्वोच्च न्यायालय में जजों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।
नए संशोधन अध्यादेश के तहत मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर अन्य न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय अधिनियम 1956 में संशोधन किया गया है।
चार नए न्यायाधीशों की नियुक्ति होगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद संसद में संशोधन विधेयक लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। अब नए फैसले के बाद चार अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
बढ़ते मामलों को लेकर लिया गया फैसला
कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार मामलों की संख्या (Supreme Court) बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा न्यायाधीशों पर काम का दबाव भी काफी बढ़ गया था। इसी वजह से लंबे समय से जजों की संख्या बढ़ाने की मांग उठ रही थी। इस फैसले को अदालत में लंबित मामलों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अधिवक्ताओं ने किया स्वागत
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि अदालत के जज तेजी से मामलों का निपटारा कर रहे हैं, लेकिन मामलों की संख्या इतनी ज्यादा है कि अतिरिक्त न्यायाधीश जरूरी (Supreme Court) हो गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के नए भवन का एक हिस्सा इसी साल शुरू होने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में सुप्रीम कोर्ट में करीब 50 न्यायाधीशों की जरूरत पड़ सकती है।



