Mazagon Dock Shipbuilders Submarines : समंदर में भारत की बढ़ेगी ताकत, राजनाथ सिंह का जर्मनी में ‘महामिशन’, 70 हजार करोड़ की पनडुब्बी डील पर दुनिया की नजर

भारत और जर्मनी के रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने (Mazagon Dock Shipbuilders Submarines) जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल तक जर्मनी की तीन दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे की सबसे बड़ी हाइलाइट वह मेगा डील है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया के रक्षा गलियारों में हो रही है।
भारत प्रोजेक्ट 75I के तहत 6 अत्याधुनिक पनडुब्बियों के लिए जर्मनी के साथ हाथ मिला सकता है। यह डील करीब 70,000 करोड़ से 99,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है, जो भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।
मुंबई के मझगांव डॉक में गूंजेगी ‘मेक इन इंडिया’ की दहाड़ (Mazagon Dock Shipbuilders Submarines) इस डील की सबसे खास बात यह है कि ये पनडुब्बियां जर्मनी से बनकर नहीं आएंगी, बल्कि इनका निर्माण भारत की धरती पर होगा।
मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) इन पनडुब्बियों को बनाएगी, जिसमें जर्मनी की दिग्गज कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स तकनीकी सहयोग प्रदान (Mazagon Dock Shipbuilders Submarines) करेगी। यह ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मोदी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
7 साल बाद कोई कैबिनेट मंत्री जर्मनी में, क्या है खास रणनीति? (Mazagon Dock Shipbuilders Submarines)
राजनाथ सिंह का यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है क्योंकि 7 साल के लंबे अंतराल के बाद भारत का कोई कैबिनेट मंत्री जर्मनी की आधिकारिक यात्रा (Mazagon Dock Shipbuilders Submarines) कर रहा है। इससे पहले 2019 में तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण वहां गई थीं।
राजनाथ सिंह अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान न केवल पनडुब्बी डील, बल्कि साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक ड्रोन तकनीक को लेकर भी बड़े समझौतों पर मुहर लग सकती है।
चीन और पाकिस्तान की बढ़ेगी बेचैनी
समंदर के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भारत को इन अत्याधुनिक पनडुब्बियों की सख्त जरूरत है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी को देखते (Mazagon Dock Shipbuilders Submarines) हुए ये पनडुब्बियां भारत के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होंगी।
जर्मनी के साथ होने वाला यह रणनीतिक रक्षा सहयोग न केवल रक्षा उत्पादन (Mazagon Dock Shipbuilders Submarines) को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक शांति अभियानों में भी भारत और जर्मनी की साझीदारी को नई मजबूती प्रदान करेगा। राजनाथ सिंह इस दौरे पर जर्मनी की प्रमुख रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे ताकि भारत में विदेशी निवेश को और तेज किया जा सके।



