CG Budget 2026 : ढाई साल के विजन को गति देने वाला बजट, वित्त मंत्री ओपी चौधरी पर टिकी नजरें
CG Budget 2026
छत्तीसगढ़ में वित्त मंत्री ओपी चौधरी मंगलवार, 24 फरवरी को विधानसभा में राज्य का बजट पेश करने (CG Budget 2026) जा रहे हैं, जिस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं। विष्णु देव साय सरकार का यह तीसरा बजट न केवल मौजूदा वित्तीय स्थिति की तस्वीर पेश करेगा, बल्कि आगामी ढाई वर्षों के विकास की दिशा भी तय करेगा।
विधानसभा सत्र के पहले दिन आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके आधार पर अगले दिन पेश होने वाला बजट सरकार की प्राथमिकताओं, वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन का संकेत देगा। यह बजट इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार अब अपने चुनावी वादों को जमीन पर उतारते हुए दीर्घकालिक विकास योजनाओं को मजबूत आधार देने की तैयारी में है।
राज्य सरकार द्वारा किसानों से 3500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये देने की योजना लागू करने के बाद वित्तीय प्रबंधन सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इन दोनों योजनाओं पर सालाना करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिससे सरकार के बजट पर बड़ा वित्तीय दबाव बना है।
हालांकि इन योजनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने और महिला सशक्तिकरण से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही सरकार के सामने विकास कार्यों के लिए संसाधनों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी हो गया है। पिछले अनुमान के अनुसार राज्य का राजकोषीय घाटा 3.8 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना जताई गई थी और इस बार के बजट में यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में कितनी सफल रही है।
बीते वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार ने 1 लाख 65 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 12 प्रतिशत अधिक था। इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि बजट का आकार बढ़कर 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये के पार जा सकता है। बजट में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
युवाओं के लिए स्वरोजगार योजनाओं, नए स्कूल और कॉलेज भवनों, नालंदा परिसर के विस्तार और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। इसके साथ ही सरकार स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ाने के संकेत भी दे सकती है।
नगरीय विकास भी इस बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहने वाला है, क्योंकि राज्य के अधिकांश नगरीय निकाय वित्तीय रूप से कमजोर स्थिति में हैं और अपने स्तर पर पर्याप्त राजस्व जुटाने में सक्षम नहीं हैं। सरकार द्वारा नगर निगमों को विकास कार्यों के लिए फंड दिया गया है,
लेकिन शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए स्थायी आय के स्रोत विकसित करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में संभावना है कि इस बजट में नगरीय निकायों को मजबूत बनाने और शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए नई वित्तीय व्यवस्था और योजनाओं की घोषणा की जा सकती है।
कुल मिलाकर यह बजट साय सरकार के लिए वित्तीय प्रबंधन और विकास के बीच संतुलन बनाने की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। सरकार को एक ओर किसानों, महिलाओं और गरीब वर्ग के लिए चलाई जा रही योजनाओं को जारी रखना है,
वहीं दूसरी ओर राज्य के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करना है। ऐसे में यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की आर्थिक दिशा और विकास मॉडल की स्पष्ट रूपरेखा भी पेश करेगा।
