संपादकीय: सड़क हादसे रोकने नई गाइडलाइन

Editorial: देश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को लेकर दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते सड़क हादसों को लेकर कठोर रूख अख्तियार किया है और इस बारे में नई गाइडलाइन जारी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है कि एक्सप्रेस वे को मौत का गलियारा न बनने दिया जाये।
गौरतलब है कि भारत में प्रतिवर्ष पांच लाख से अधिक सड़का दुर्घटनाएं होती हैं और इनकी वजह से पौने दो लाख लोगों की जान चली जाती है। वहीं लाखों की संख्या में लोग हादसों के शिकार बनते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने नई गाइडलाइन जारी कर निदेर्श दिया है कि नेशनल हाइवे पर भारी वाहनों को सड़क के किनारे न खड़े होने दिया जाये।
हाइवे के किनारे बने नए ढाबों और दुकानों तथा अन्य निर्माणों को 60 दिनों के भीतर हटा दिया जाये और देश के हर जिले में हाइवे सेफ्टी टास्क फोर्स का गठन किया जाये जो सड़क सुरक्षा पर सतत निगरानी रखे। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की यह नई गाइडलाइन तभी सार्थक होगी जब इस पर ईमानदारी से अमल किया जाये।
वास्तव में नेशनल हाइवे सहित अन्य सड़को पर लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनायें गंभीर चिंता का विषय है और इनमें से ज्यादातर सड़क दुर्घटनाएं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने तथा नशे की हालत में गाड़ी चलाने और यातायात नियमों का उल्लंघन करने के कारण होती है। सड़को के किनारे जहां तहां गाडिय़ों की पार्किंग कर देना भी ऐसे सड़क हादसों को जन्म देने का एक बड़ा कारण है। जिसे दूर करना यातयात पुलिस का काम है लेकिन वह अपने कत्वर्य के निर्वहन में असफल हो रही है। बहरहाल उम्मीद की जानी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट की इस नई गाइडलाइन का कड़ाईपूर्वक पाल किया जाएगा तभी सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।



