सही समय पर लिया गया बड़ा फैसला

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त्वरित टिप्पणी : गिरीश पंकज
छत्तीसगढ़ के किसान इस बात को लेकर बेहद नाराज़ चल रहे थे कि भाजपा सरकार बोनस की घोषणा ही नहीं कर रही है. इस मुद्दे को लेकर किसान आंदोलन भी करते रहे और कांग्रेस को भी मौका मिलता रहा कि सरकार किसानो से छल कर रही है, लेकिन आज एक ही घोषणा में सारे विरोधी स्वर हतप्रभ रह गए।, जब सरकार ने ऐलान किया कि प्रदेश के लगभग 13 लाख किसानों को 2100 करोड़ रूपये का बोनस बांटेगी। यह एक बड़ी घोषणा है और सरकार की खराब हो रही छवि को चमकाने का सधा हुआ निर्णय भी है। इस घोषणा को आगामी वर्ष चुनाव के मद्देनजऱ भी देखा जा रहा है, लेकिन हिडेन एजेंडा जो भी हो, महत्वपूर्ण है यह घोषणा दिवाली के पहले किसानो को एक तरह से दिवाली का सुंदर उपहार देने जैसा है. मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने जब सांसद विधायकों व पदाधिकारियों की आपात बैठक बुलाई तो तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे कि पता नहीं क्या होगा, लेकिन जब किसानो के हित में घोषणा हुई तो सब के सब चकित रह गए। विपक्ष के सपने तार-तार से हो गए. यह एक बड़ा मुद्दा था, जिसके सहारे वह अगले साल चुनाव में ले कर आने वाला था. यह मुद्दा हाथ से निकल गया और बड़ा मुद्दा बचा है, शराब बंदी। अगर आने वाले कुछ महीनों में भाजपा इसकी भी घोषाण कर दे तो कोई बड़ी बात नहीं कि अगले साल वह फिर से सत्ता में काबिज हो जाए. हालांकि ऐसा होगा या नहीं, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन फिलहाल किसानो को बोनस देने की घोषणा ने भाजपा के कार्यकर्ताओं के मन में भविष्य के लिए और भी आशाएं जगा दी है। किसी भी कल्याणकारी सरकार का यही दायित्व है कि वह जनता के हित में कितना बेहतर कर सकती है. छत्तीसगढ़ में आत्महत्याएं बढ़ी थी. इसे लेकर सरकार को बैकफुट में आना पड़ता था. सरकार इसे लेकर चिंतित थी, लेकिन वह कुछ कर नहीं पा रही थी. आज अनेक इलाकों में अवर्षा के चलते सूखे की स्थिति भी निर्मित है. किसान परेशांन है. वे अपने अपने क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी कर रहे थे, पिछले साल भी अनेक इलाकों में सूखे की स्थिति बनी थी, तब एक बड़ा सर्वे हुआ था ताकि किसानो की फसल बर्बादी का उन्हें मुआवजा दिया जा सके, लेकिन उन्हें मुआवजा मिल ही नहीं पाया. इस कारण किसानो में गुस्सा था. लेकिन ऐसे समय में 2100 करोड़ के बोनस की घोषणा ने किसानों के बुझे चेहरों पर चमक आ गई है. किसानो को बोनस की पहली किश्त दीवाली के समय दी जाएगी, इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है? यह बोनस गत वर्ष का है. इस वर्ष का बोनस अगले साल दिया जाएगा. घोषणा के पीछे चुनावी रणनीति भी लगती लगती है, लेकिन यह कोई बुरी बात भी नहीं है। सत्ता का रचनात्मक इस्तेमाल होना ही चाहिए। लोकतान्त्रिक सरकारों को यह काम करना ही चाहिए. सरकार की इस घोषणा की तारीफ़ होनी चाहिए कि सरकार ने अच्छा काम किया। लेकिन यह रखा जाना चाहिए कि बोनस वितरण के समय बिचौलिए न सक्रिय हो जाएं। किसानो को उनकी पूरी राशि मिले। एक भी पैस किसी अन्य के पेट में न जाएं। उम्मीद है, सरकार जनहित में इसी तरह बड़े फैसले लेती रहेगी।

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