मध्यप्रदेश

Women Helpline 181 MP : ‘वन नेशन, वन हेल्पलाइन’ को मध्यप्रदेश में नई धार, 181-1098 और 112 के एकीकरण से मजबूत हुआ महिला-बाल सुरक्षा तंत्र

मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने तकनीक आधारित सहायता तंत्र को जिस तरह आगे (Women Helpline 181 MP) बढ़ाया है, उसने “वन नेशन, वन हेल्पलाइन” पहल को प्रदेश स्तर पर नई मजबूती दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण और त्वरित सहायता व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, संवेदनशील और समन्वित बनाने पर जोर दिया गया है।

यही वजह है कि अब महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को आपातकालीन सेवा ईआरएसएस-112 से जोड़कर एकीकृत सहायता प्रणाली के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिससे संकट की घड़ी में मदद तक पहुंच पहले से ज्यादा तेज और व्यवस्थित हुई है।

राज्य सरकार लगातार यह संदेश देती रही है कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता किसी भी विकसित समाज की बुनियादी (Women Helpline 181 MP) शर्त है। इसी सोच के तहत प्रदेश में महिला और बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं, सहायता सेवाओं और तकनीकी प्लेटफॉर्म को मजबूत किया गया है।

महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, जागरूकता कार्यक्रम और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में हुए प्रयास अब प्रशासनिक ढांचे को ज्यादा प्रभावी बनाते दिख रहे हैं। सरकार का दावा है कि इससे जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने में सुविधा हुई है।

भारत सरकार की “वन नेशन, वन हेल्पलाइन” पहल के अनुरूप महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को ईआरएसएस-112 से एकीकृत करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग का राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम 31 अगस्त 2023 को स्थापित किया गया।

इस व्यवस्था के तहत अब प्रदेश की कोई भी महिला, 18 वर्ष से कम आयु का कोई बच्चा या उनकी ओर से कोई अन्य व्यक्ति सप्ताह के सातों दिन, चौबीसों घंटे 181, 1098 या 112 पर टोल फ्री कॉल कर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकता है। यह एकीकृत मॉडल सिर्फ तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि संकट में फंसे लोगों के लिए एक भरोसेमंद और केंद्रीकृत मदद तंत्र के रूप में सामने आया है।

महिला हेल्पलाइन 181 को हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए त्वरित सहायता के प्रमुख माध्यम के तौर पर विकसित किया गया है। यह सेवा प्रदेश के सभी वन स्टॉप सेंटर से जुड़ी हुई है, जिससे जरूरतमंद महिला को एक ही प्लेटफॉर्म से पुलिस, अस्पताल, एम्बुलेंस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संरक्षण अधिकारी और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराई जाती है।

इसके साथ ही हेल्पलाइन के जरिए महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाती है और प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा भावनात्मक तथा मनोवैज्ञानिक सहयोग भी मुहैया कराया जाता है। यह मॉडल सिर्फ शिकायत दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सहायता, मार्गदर्शन और संरक्षण की एक समग्र व्यवस्था के रूप में काम करता है।

इस सेवा की उपयोगिता का अंदाजा उपलब्ध आंकड़ों से भी लगाया (Women Helpline 181 MP) जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक करीब 1.28 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से सहायता दी जा चुकी है।

यह संख्या इस बात का संकेत है कि हेल्पलाइन अब सिर्फ एक सरकारी सुविधा नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं के लिए वास्तविक सहारे के रूप में इस्तेमाल हो रही है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि शिकायतों और सहायता की जरूरत के मामलों में ऐसी सेवाओं की मांग लगातार बनी हुई है।

वहीं बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को भी ईआरएसएस-112 से जोड़कर ज्यादा प्रभावी बनाया गया है। इस हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स को कॉल रिस्पॉन्डर उनकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत करते हैं। आपात स्थिति वाले मामलों को तुरंत ईआरएसएस-112 और संबंधित जिले की जिला बाल संरक्षण इकाई को भेजा जाता है, जबकि अन्य मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए सीधे जिला बाल संरक्षण इकाई को सूचना प्रेषित की जाती है। इससे मामलों के निस्तारण में समय की बचत होती है और बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में त्वरित हस्तक्षेप संभव हो पाता है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से 26 हजार 974 बच्चों को विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। इन मामलों में संकटग्रस्त बच्चों को संरक्षण, परामर्श, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है। यह आंकड़ा बताता है कि बाल संरक्षण तंत्र में हेल्पलाइन की भूमिका केवल सूचना लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे राहत, बचाव और पुनर्वास की प्रक्रिया से जुड़ी हुई है।

मध्यप्रदेश में 181, 1098 और 112 के एकीकरण को महिला-बाल सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा (Women Helpline 181 MP) जा सकता है। इस व्यवस्था ने अलग-अलग सहायता सेवाओं को एक समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र में बदलने का प्रयास किया है, जहां पीड़ित को यह सोचने की जरूरत कम पड़ती है कि किस समस्या के लिए किस विभाग तक पहुंचे।

अब चुनौती इस बात की है कि इस तंत्र की पहुंच गांवों और दूरस्थ इलाकों तक कितनी गहराई से बनती है और सहायता की गुणवत्ता हर जिले में किस स्तर पर कायम रहती है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि तकनीक आधारित यह मॉडल प्रदेश में महिला और बाल सुरक्षा को अधिक संरचित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम कदम बनकर उभरा है।

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