संपादकीय: क्या अमेरिका का उपनिवेश बनेगा वेनेजुएला

Will Venezuela become a US colony?

Will Venezuela become a US colony?

Editorial: अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति वेनेजुएला और उनकी धर्मपत्नि को उठवाकर अपने कब्जे में ले लिया है अब उनके खिलाफ अमेरिका में मुकदमा चलेगा और जाहिर है कि उन्हें लंबी सजा होगी। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर आधिपत्य की घोषणा कर दी है।

डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार जब तक वेनेजुएला में चुनाव नहीं हो जाते और लोकतांत्रिक सरकार का गठन नहीं हो जाता तब तक अमेरिका ही वेनेजुएला का शासन चलाएगा। दूसरे शब्दों में कहे तो अब लंबे समय के लिए वेनेजुएला अमेरिका का उपनिवेश बन गया हालांकि की वहां के उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति बनाया गया है लेकिन वे अमेरिका से पूछे बगैर कोई निर्णय नहीं ले पाएंगी।

आगे चलकर वेनेजुएला में यदि चुनाव हुए तो वहां का राष्ट्रपति अमेरिका के पसंद का ही होगा और वह अमेरिका के हाथों की कठपुतली बनकर रहेगा। ताकि अमेरिकी कंपनियों को फिर से वेनेजुएला के तेल भंडारों का दोहन करने का अवसर मिले। वेनेजुएला की राष्ट्रपति पद के लिए हो रही दौड़ में फिलहाल अमेरिका परस्त मारिया कोरिना सबसे आगे हैं जो वेनेजुएला में विपक्ष की नेता हैं। यह वही मारिया कोरिना है जिन्हें हाल ही में शांति का नोबल पुरस्कार मिला है। अब तो यह कयास भी लगाये जा रहे हैं कि मारिया कोरिना को नोबल पुरस्कार दिलाना भी अमेरिका और डीपस्टेट की साजिश का ही हिस्सा है।

गौरतलब है कि वेनेजुएला में दो दशक पूर्व तक अमेरिकी कंपनियां तेल निकालने का कारोबार करती थी लेकिन जब वहां वामपंथी सरकार बनी तो उसने तेल भंडारों का राष्ट्रीय करण कर दिया और अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला से हकाल दिया। निकोलस मदुरौ भी वापमंथी पार्टी के ही नेता है और उन्होंने तो अमेरिका को आंखे दिखाना भी शुरू कर दिया था। चीन के साथ निकोलस मदुरौ ने व्यापारिक समझौता करके अमेरिका को अपना दुश्मन बना लिया था।

उसी समय से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में तख्तापलट की योजना पर काम कर रहे थे और अंतत: उन्होंने वेनेजुएला पर कब्जा कर ही लिया। अब वहां अमेरिकी कंपनियां तेल निकालेंगी और चीन व रूस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस तरह डोनाल्ड ट्रंप ने एक तीर से कई शिकार कर लिये हैं। वेनेजुएला के खिलाफ की गई अमेरिका की सैन्य कार्यवाही की दुनिया के कई देश भले ही निंदा करें लेकिन इससे अमेरिका को कोई फर्क नहीं पड़ता। हालांकि यह मामला संयुक्त राष्ट्र में उठने वाला है लेकिन उसमें भी अमेरिका का ही दबदबा है।

रही बात भारत की तो उसने वेनेजुएला में अमेरिका द्वारा की गई कार्यवाही पर बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। न काहु से दोस्ती न काहु से बैर वाली उक्ती पर अमल करते हुए भारत ने इस पर कहा है कि शांतिपूर्वक समस्या का समाधान खोना चाहिए। दरअसल भारत भी अपना हित देख रहा है। भारत की भी एक तेल कंपनी वेनेजुएला में काम कर रही थी जिसपर निकोलस मदुरौ ने रोक लगाई थी। इस भारतीय कंपनी का नौ हजार करोड़ रूपये वहां फंसा हुआ है जो भारत को वापस मिल जाएगा और भारतीय कंपनी भी अमेरिकी कंपनियों की तरह वहां तेल निकालने का काम कर सकेंगी। इसलिए वहां सत्ता परिवर्तन भारत के भी हित में है।

You may have missed