क्या कर्मचारियों के पीएफ में बड़ी बढ़ोतरी होगी? सैलरी लिमिट 15 हज़ार से बढ़ाकर 25 हज़ार करने की तैयारी

Will there be a significant increase in employees' provident fund contributions? Plans are underway to raise the salary limit from ₹15,000 to ₹25,000.

epf new rules 2026

नई दिल्ली। EPF New Rules 2026: केंद्र सरकार प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की सोशल सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन के तहत ज़रूरी पीएफ कटौती के लिए सैलरी लिमिट को मौजूदा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया जा रहा है। 12 साल बाद आने वाले इस बदलाव से लाखों नए कर्मचारी पीएफ के दायरे में आएंगे। अगले महीने होने वाली सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ की मीटिंग में इसे मंज़ूरी मिलने की संभावना है, और इसे 1 अप्रैल, 2026 से लागू किया जा सकता है।

12 साल का वनवास खत्म होगा!

पिछली बार पीएफ के लिए सैलरी लिमिट 2014 में 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये की गई थी। पिछले एक दशक में महंगाई और कर्मचारियों की सैलरी में काफी बढ़ोतरी हुई है। कई कर्मचारी ज़रूरी पीएफ के दायरे से बाहर हो गए थे क्योंकि उनकी सैलरी 15,000 रुपये से ज़्यादा हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी बढ़ती महंगाई को देखते हुए इस लिमिट को बढ़ाने का निर्देश दिया था। इस संदर्भ में सरकार इस प्रस्ताव पर तेज़ी से आगे बढ़ी है।

कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?

पीएफ डिडक्शन लिमिट बढऩे से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से ज़्यादा रकम कटेगी। नतीजतन, आपको हर महीने मिलने वाली सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी। डिडक्शन बढऩे का मतलब है कि आपके पीएफ अकाउंट में हर महीने ज़्यादा पैसे जमा होंगे। इस पर मिलने वाले कंपाउंड इंटरेस्ट को देखते हुए, रिटायरमेंट के समय आपको मिलने वाली कुल रकम में काफ़ी बढ़ोतरी होगी। ईपीएफ के साथ-साथ ईपीएस में कंट्रीब्यूशन भी बढ़ेगा, जिससे भविष्य में आपको मिलने वाली पेंशन की रकम में सुधार होगा।

कंपनियों को लगेगा ‘डबल झटका’

इस फ़ैसले से कंपनियों पर फ़ाइनेंशियल बोझ बढ़ेगा। कर्मचारियों का पीएफ का हिस्सा काटने के साथ-साथ कंपनी को अपनी जेब से भी ज़्यादा कंट्रीब्यूट करना होगा। इस फ़ैसले को उन कंपनियों के लिए ‘डबल झटकाÓ माना जा रहा है जो पहले से ही नए लेबर कोड और ग्रेच्युटी के बढ़ते बोझ की वजह से दबाव में हैं।