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West Bengal Election 2026 : बंगाल चुनाव से पहले ‘वोटर लिस्ट’ पर संग्राम, सुप्रीम कोर्ट पहुँचा मामला, 13 अप्रैल को होगा बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है, लेकिन मतदान से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर (West Bengal Election 2026) कानूनी जंग छिड़ गई है। चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट को ‘फ्रीज’ करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिस पर शीर्ष अदालत 13 अप्रैल को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई है। दरअसल, बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है।

आयोग के नियम के मुताबिक, लिस्ट फ्रीज होने के बाद अब किसी भी नए मतदाता का नाम जोड़ना मुमकिन नहीं है। याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि हजारों लोगों के नाम जोड़ने की अपील अभी भी लंबित है और आयोग का 9 अप्रैल को लिस्ट लॉक करने का फैसला कई नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित कर सकता है।

60 लाख दावे और आपत्तियों का पेच, ‘सीमा रेखा’ पर उलझा चुनाव आयोग (West Bengal Election 2026)

पश्चिम बंगाल में इस बार मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया गया, जिसमें करीब 60 लाख लोगों के नामों को लेकर दावे और आपत्तियां सामने आई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने पुरानी प्रक्रियाओं पर गौर किया।

आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने स्पष्ट किया कि 9 अप्रैल की डेडलाइन पार हो चुकी है और अब किसी भी नई अपील पर विचार करना चुनाव प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है। हालांकि, जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि मतदाता सूची में नाम होना और मतदान करना एक स्थायी संवैधानिक अधिकार है, जो चुनाव की किसी भी ‘कट-ऑफ’ तारीख से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

क्या 13 अप्रैल को मिलेगी राहत? 19 न्यायाधिकरणों की भूमिका पर भी नजर (West Bengal Election 2026)

अदालत अब इस बात पर विचार कर रही है कि क्या उन लोगों को मतदान से रोका जा सकता है जिनकी अपीलें अभी भी प्रक्रिया में हैं। इससे पहले कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया था कि वे मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों के निपटारे के लिए 19 न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) हेतु एक समान प्रक्रिया तैयार करें।

इसके लिए तीन सदस्यीय विशेष पैनल के गठन का सुझाव भी दिया (West Bengal Election 2026) गया था। अब सबकी निगाहें 13 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि बंगाल की 152 सीटों पर पहले चरण का भविष्य इसी फैसले से तय होगा। अगर कोर्ट नरमी दिखाता है, तो आयोग को अंतिम समय में वोटर लिस्ट में संशोधन करना पड़ सकता है, जो चुनावी तैयारियों के लिहाज से एक बड़ी चुनौती होगी।

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