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बैंक ऑफ महाराष्ट्र- LIC समेत ‘इन’ 5 बैंकों में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, निवेशकों को क्या होगा फायदा?

-सरकारी कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया फिर से शुरू होने वाली है

नई दिल्ली। Government will sell stake: सेबी के नियमों के मुताबिक, किसी भी कंपनी के प्रमोटर्स के पास 75% से ज़्यादा हिस्सेदारी नहीं होनी चाहिए। लेकिन अब भारत सरकार एलआईसी (भारतीय जीवन बीमा निगम) और कुछ सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने की तैयारी कर रही है। इन बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 75% से ज़्यादा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इसके लिए मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति करेगी। हाल के दिनों में सरकारी बैंकों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। सरकार ने जून तिमाही में इन बैंकों से 44,218 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है, जो पिछले साल की तुलना में 11% ज़्यादा है।

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एलआईसी में हिस्सेदारी कम होगी

सरकार के पास अभी एलआईसी (LIC) में 96.5% हिस्सेदारी है। तीन साल पहले सरकार ने आईपीओ के ज़रिए 3.5% हिस्सेदारी बेची थी। सेबी ने एलआईसी को न्यूनतम 10% सार्वजनिक शेयरधारिता नियम को पूरा करने के लिए मई 2027 तक का समय दिया है। एलआईसी का बाज़ार पूंजीकरण लगभग 5.66 लाख करोड़ रुपये है।

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  • सरकार को कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% करनी होगी।
  • इनमें इंडियन ओवरसीज़ बैंक: सरकार की हिस्सेदारी 94.61%,
  • यूको बैंक: सरकार की हिस्सेदारी 90.95%,
  • पंजाब एंड सिंध बैंक: सरकार की हिस्सेदारी 93.85%,
  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: सरकार की हिस्सेदारी 89.27%
  • बैंक ऑफ महाराष्ट्र: सरकार की हिस्सेदारी 79.60% शामिल हैं।

इन बैंकों को अगले साल अगस्त तक यह सीमा पूरी करनी होगी। इनमें से केवल बैंक ऑफ महाराष्ट्र ही इस समय सीमा को पूरा कर पाएगा, जबकि बाकी बैंक एक साल का विस्तार मांग सकते हैं।

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