संपादकीय: वक्फ बिल को संसद में हरी झंडी

Wakf Bill gets green signal in Parliament
Wakf Bill gets green signal in Parliament: वक्फ संशोधन बिल पहले लोकसभा में और फिर राज्यसभा में पारित हो गया। संसद में वक्फ बिल को हरी झंडी मिलने के बाद अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जा रहा है और उनके हस्ताक्षर के बाद वक्फ संशोधन बिल कानूनी शक्ल अख्तियार कर लेगा। संसद के दोनों ही सदनों में एनडीए को बहुमत प्राप्त है। इसलिए इस बिल का पारित होना तय था। किन्तु कांग्र्रेस सहित आईएनडीआईए में शामिल अन्य विपक्षी पार्टियां उम्मीद के खिलाफ यह उम्मीद कर रही थी कि एनडीए में शामिल भाजपा के सहयोगी दल जदयू और तेलगु देशम पार्टी इस बिल के खिलाफ मतदान कर सकती हैै।
इसके लिए विपक्षी नेताओं ने एनडीए में दरार डालने की हर संभव कोशिश की लेकिन उनकी दाल नहीं गली। जदयू और तेलगू देशम सहित एनडीए में शामिल सभी राजनीतिक पार्टियों ने इस बिल का समर्थन किया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में ही इस बिल पर लंबी चर्चा हुई। विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने वक्फ संसोधन बिल की जमकर मुखालफत की। अस्सुदीन औवैसी ने तो इस बिल का विरोध करते हुए बिल को फाड़ दिया।
अन्य विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने भी बिल के खिलाफ अपने विचार रखे और भाजपा पर आरोप लगाया कि वह अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय करने जा रही है। यह संविधान विरोधी बिल है। जिसका देश पर विपरित प्रभाव पड़ेगा। एक विपक्षी सांसद ने तो यहां तक कह दिया कि अल्पसंख्यक समुदाय इस कानून को स्वीकार नहीं करेगा इस पर पलटवार करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आप किसको धमकाना चाहते हो यह संसद का कानून है जिसे सबको स्वीकार करना पड़ेगा।
अमित शाह ने विपक्ष द्वारा इस बिल को लेकर फैलाये जा रहे भ्रम को लेकर यह बिल वक्फ की संपत्ति के उचित रखरखाव के लिए है। न की वक्फ की जमीन पर कब्जा करने के लिए है। उन्होंने कहा कि इस बिल के पारित हो जाने के बाद गरीब और पिछड़े अप्लसंख्यकों महिलाओं और बच्चों के हितों का संरक्षण होगा। केन्द्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी स्पष्ट किया कि इस विधेयक से अल्पसंख्यकों को फायदा मिलेगा।
किसी भी मस्जिद दरगाह , कब्रिस्तान या अन्य किसी धार्मिक स्थान को हड़पने का प्रश्न ही नहीं उठता, बल्कि इस बिल के लागू होने से वक्फ को दान की गई संपत्ति का बेहतर ढंग से प्रबंधन होगा और अल्पसंख्यक समुदाय के गरीबों को लाभ मिलेगा। सरकार ने दावा किया है कि आने वाले कुछ सालों बाद इस बिल का लाभ अल्पसंख्यकों को देखने को मिलेगा। लोकसभा की तरह ही राज्यसभा में भी वक्फ संशोधन बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबी बहस हुई और अंतत: वहां भी यह बिल पास हो गया।
विपक्ष के नेता अब इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कर रहे हैं और सड़क पर उतर कर इस बिल के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट है कि संसद में वक्फ संशोधन बिल विपक्ष के भारी विरोध के बाद पारित हो जाने के बावजूद इसके खिलाफ विपक्ष हल्ला बोलता रहेगा। कुछ विपक्षी नेताओं का यह मानना है कि जिस तरह किसानों के लिए तीन नये कृषि कानून संसद में पारित किये गये थे और उन नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने बड़ा आंदोलन खड़ा किया था।
उसे देखते हुए मोदी सरकार ने उन कृषि कानूनों को वापस ले लिया था। इसी तरह यदि वक्फ संसोधन विधेयक के खिलाफ सड़क पर उतर कर बड़ा आंदोलन किया जाये तो सरकार इसे भी वापस लेने पर मजबूर की जा सकती है किन्तु ऐसा हो पाना असंभव है। क्योंकि वक्फ संशोधन विधेयक के पक्ष में पसमांदा सहित अन्य कई अल्पसंख्यक संगठन सामने आ चुके हैं। भोपाल से लेकर मुंबई तक अनेक स्थानों पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने वक्फ संशोधन बिल के पारित होने पर खुशी जताई है।
यहां तक की आतिश बाजी की गई और मिठाई खिलाकर एक दूसरे का मुंह मीठा किया गया ऐसे में विपक्षी पार्टियों के नेताओं की भड़काऊ बयानबाजी के बाद भी अल्पसंख्यक समुदाय के सभी लोग इस बिल के विरोध में बड़ा आंदोलन करेंगे इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है। यही वजह है कि अब विपक्ष के नेता यह बयान दे रहे हैं कि जब केन्द्र में भाजपा की जगह उनकी सरकार बनेगी तो वे इस बिल को निरस्त कर देंगे।
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बिल को संविधान विरोधी करार देते हुए ऐलान किया है कि जब केन्द्र में आईएनडीआईए की सरकार बनेगी तो इस कानून को रद्द कर दिया जाएगा। उनके सुर में सुर मिलाते हुए कांग्रेस के नेताओं ने भी इसी तरह के बयान दिये हैं कुल मिलाकर अब वक्फ संशोधन बिल को लेकर जमकर सियासत होगी। गौरतलब है कि पांच माह बाद बिहार विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं और अगले साल बंगाल विधानसभा के भी चुनाव होंगे।
इन दोनों ही राज्यों में अल्पसंख्यक वोटर निर्णायक भूमिका निभाते है इसलिए इन राज्यों के विधानसभा चुनाव में आईएनडीआईए में शामिल पार्टियों द्वारा वक्फ बिल को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। बिहार में तो यह अभी से एक बड़ा मुद्दा बन गया है। देखना दिलचस्प होगा कि वक्फ बिल से किस राजनीतिक पार्टी को कितना नफा होता है और किस पार्टी को कितना नुकसान उठना पड़ता है।