Vishnudev Sai Meeting : अधूरी सिंचाई परियोजनाओं पर मुख्यमंत्री सख्त, बोले–किसानों की तरक्की से ही बनेगा विकसित छत्तीसगढ़

लंबे समय से अटकी योजनाएं अब और फाइलों में नहीं चलेंगी। किसानों से जुड़े कार्यों में देरी पर सरकार का रुख सख्त होता दिख रहा है और स्पष्ट संकेत मिल चुके हैं कि अब परिणाम जमीन पर दिखाई देने चाहिए।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जल संसाधन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर राज्य की सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा (Vishnudev Sai Meeting) की। बैठक में संचालित, प्रस्तावित और लंबित परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों की समृद्धि के लिए मजबूत सिंचाई ढांचा अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य की दिशा में लगातार काम कर रही है और इसके लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार सबसे अहम कड़ी है। उन्होंने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना के तहत शामिल कर समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए। निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती का रकबा बढ़ रहा है और किसानों की जरूरतों को देखते हुए सिंचाई ढांचे को और सुदृढ़ करना जरूरी (Vishnudev Sai Meeting) है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सिंचाई परियोजनाओं के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए अलग से बजटीय प्रावधान किए गए हैं। इन योजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीकों से संचालित सिंचाई व्यवस्था देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई के क्षेत्र में बेहतर नवाचार हो रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों को भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हों।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि अगले तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूरा करने की योजना है, जिससे करीब 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च से मई के बीच भूमिपूजन प्रस्तावित है, जिनकी लागत 4,800 करोड़ रुपये से अधिक है।
इन प्रमुख योजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन योजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना, तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं।
इसके अलावा अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट (Vishnudev Sai Meeting) आबंटित किया गया है, जिससे लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित की जाएगी।
बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों पर भी चर्चा हुई। महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डूब क्षेत्र और समक्का बैराज से जुड़े मामलों के समाधान के लिए आगामी वर्षों में ठोस प्रयास करने पर सहमति बनी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



