Vijay Politics : तीन बार लौटे, दो बार टला शपथ ग्रहण, तमिलनाडु में फसी विजय की सियासत

तमिलनाडु की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से लगातार उठापटक का दौर (Vijay Politics) जारी है। चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी सरकार गठन का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है। इसी बीच अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी को लेकर राज्यभर में चर्चाएं तेज हैं। समर्थकों में जहां उत्साह था, वहीं अब लगातार बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितता से बेचैनी भी दिखाई देने लगी है।

सरकार गठन को लेकर हर दिन नया मोड़ सामने आ रहा है। कभी समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है तो कभी सहयोगी दलों के पीछे हटने की खबरें सामने आ रही हैं। इसी वजह से विजय का शपथ ग्रहण अब तक दो बार टल चुका है और सियासी संकट लगातार गहराता जा रहा है।

बहुमत के आंकड़े से अभी भी दूर : Vijay Politics

टीवीके पार्टी चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायकों का समर्थन अभी तक पूरी तरह नहीं जुटा पाई है। यही वजह है कि राज्यपाल की ओर से सरकार गठन को लेकर लगातार स्पष्ट समर्थन पत्र मांगा जा रहा है।

तीन बार राज्यपाल से लौटना पड़ा

विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए कई बार राज्यपाल से मुलाकात की, लेकिन हर बार उन्हें जरूरी संख्या पूरी करने को कहा गया। पहले कांग्रेस के समर्थन से संख्या बढ़ी, लेकिन उसके बाद भी बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया। इसी कारण राज्यपाल ने उन्हें तीन बार वापस भेज दिया।

दो बार टला शपथ ग्रहण

पहली बार 7 मई को शपथ ग्रहण की तैयारी की गई थी। समर्थक भी बड़ी संख्या में पहुंचने लगे थे, लेकिन आखिरी समय में कार्यक्रम टाल दिया गया। इसके बाद 9 मई को फिर नई तारीख सामने आई, लेकिन समर्थन पत्रों को लेकर स्थिति साफ नहीं होने पर यह कार्यक्रम भी रद्द हो गया।

सहयोगी दलों के रुख से बढ़ा संकट

टीवीके की ओर से दावा किया गया था कि कई दलों का समर्थन मिल (Vijay Politics) चुका है। हालांकि बाद में कुछ दलों ने खुलकर समर्थन देने से इनकार कर दिया। विशेष रूप से वीसीके और आईयूएमएल के रुख ने पूरे समीकरण को बदल दिया। एक दल ने फैसला बाद में लेने की बात कही, जबकि दूसरे ने साफ कर दिया कि वह डीएमके के साथ है।

समर्थन पत्र को लेकर भी शुरू हुआ विवाद

राजनीतिक संकट के बीच समर्थन पत्रों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। एक विधायक के समर्थन को लेकर फर्जी दस्तावेज देने तक के आरोप लगाए गए। हालांकि संबंधित विधायक ने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से समर्थन दिया था।

समर्थकों में बढ़ रही बेचैनी

लगातार बदलते घटनाक्रम के कारण विजय समर्थकों में भी नाराजगी और बेचैनी बढ़ती दिखाई (Vijay Politics) दे रही है। राज्य में सरकार गठन को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है और राजनीतिक गलियारों में आगे भी बड़े घटनाक्रम की चर्चा जारी है।

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