Supreme Court: सर्वोच्च अदालत में बढ़ी न्यायाधीशों की संख्या, केंद्र ने दी पांच नए नामों को मंजूरी

देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया (Supreme Court) गया है। लंबे समय से लंबित पदों को भरने की प्रक्रिया के तहत अब पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी मिल गई है। इन नियुक्तियों के बाद न्यायपालिका से जुड़े हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे मामलों के निपटारे की रफ्तार बढ़ेगी।

नई नियुक्तियों को लेकर कानूनी समुदाय और न्यायिक क्षेत्र में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी और महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई में तेजी आ सकती है।

पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति : Supreme Court

केंद्र सरकार ने पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। जल्द ही ये सभी न्यायाधीश शपथ ग्रहण कर अपना कार्यभार संभालेंगे। इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी। हालांकि अभी भी एक पद खाली रहेगा, क्योंकि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार सर्वोच्च अदालत में अधिकतम 38 न्यायाधीश नियुक्त किए जा सकते हैं।

इन नामों को मिली मंजूरी

नियुक्त किए गए न्यायाधीशों में वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना, बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा तथा जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली शामिल हैं। इनके पदभार ग्रहण करने के बाद शीर्ष अदालत की न्यायिक क्षमता और मजबूत होगी।

मंत्री ने दी जानकारी

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सामाजिक मंच पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत इन नियुक्तियों को मंजूरी प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि नियुक्तियां निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई हैं।

हाल ही में बढ़ाई गई थी स्वीकृत संख्या

पिछले महीने सरकार ने एक संशोधन के जरिए सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ा (Supreme Court) दी थी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सहित कुल स्वीकृत पदों की संख्या 38 हो गई। स्वीकृत संख्या बढ़ने के बाद अदालत में रिक्त पदों की संख्या भी बढ़ी थी, जिन्हें भरने की प्रक्रिया शुरू की गई।

कॉलेजियम ने की थी सिफारिश

इन पांच नामों की सिफारिश सर्वोच्च अदालत के कॉलेजियम ने 27 मई को की थी। सिफारिश के कुछ ही दिनों के भीतर नियुक्तियों को मंजूरी मिल गई। यह प्रक्रिया न्यायिक नियुक्तियों में तेजी का संकेत भी मानी जा रही है।

लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी मदद

नई नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और सुनवाई प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना (Supreme Court) है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लिए अधिक पीठों का गठन संभव होगा, जिससे न्यायिक कार्यप्रणाली को मजबूती मिलेगी और लोगों को समय पर न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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