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Utility Vehicle Growth India : फरवरी में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 10.6 फीसदी बढ़ी, यूटिलिटी व्हीकल्स ने संभाली रफ्तार

फरवरी में घरेलू ऑटो बाजार से राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। यात्री वाहनों की थोक बिक्री में 10.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल 4,17,705 यूनिट वाहन डीलरों (Utility Vehicle Growth India) तक पहुंचे। पिछले साल फरवरी में यह आंकड़ा 3,77,689 यूनिट था।

इस बढ़त से साफ है कि बाजार में मांग बनी हुई है और ग्राहकों की दिलचस्पी खासकर बड़े और बहुउपयोगी वाहनों की ओर ज्यादा देखी जा रही है। हालांकि उद्योग जगत की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर आगे चलकर सप्लाई चेन, उत्पादन और निर्यात पर पड़ सकता है।

यूटिलिटी व्हीकल्स ने दिखाई सबसे ज्यादा ताकत

फरवरी के आंकड़ों में सबसे बड़ी मजबूती यूटिलिटी व्हीकल्स से आई। इस श्रेणी की थोक बिक्री 13.5 फीसदी बढ़कर 2,36,957 यूनिट पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 2,08,795 यूनिट थी। यह संकेत देता है कि बाजार में एसयूवी और इसी श्रेणी के वाहनों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

दूसरी तरफ, कार सेगमेंट में थोड़ी नरमी दिखाई दी। कारों की थोक बिक्री 3.8 फीसदी घटकर 1,06,799 यूनिट रह गई, जो पिछले साल फरवरी में 1,10,966 यूनिट थी। वैन सेगमेंट में बहुत बड़ा उछाल नहीं दिखा, लेकिन इसमें हल्की बढ़त जरूर दर्ज हुई और बिक्री 11,620 यूनिट तक पहुंची।

दोपहिया बाजार में जबरदस्त उछाल

यात्री वाहनों के साथ-साथ दोपहिया सेगमेंट ने भी फरवरी में जोरदार प्रदर्शन किया। कुल दोपहिया बिक्री 35.2 फीसदी बढ़कर 18,71,406 यूनिट (Utility Vehicle Growth India) हो गई। मोटरसाइकिल की बिक्री 30.8 फीसदी बढ़कर 10,96,537 यूनिट रही, जबकि स्कूटर सेगमेंट ने और तेज रफ्तार पकड़ी।

स्कूटर की बिक्री 42.3 फीसदी बढ़कर 7,29,774 यूनिट दर्ज की गई। यह उछाल इस बात का संकेत माना जा रहा है कि शहरी और अर्धशहरी बाजारों में व्यक्तिगत मोबिलिटी की मांग मजबूत बनी हुई है।

तिपहिया वाहनों में भी मजबूत रिकवरी

फरवरी में तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इस श्रेणी की कुल बिक्री 29 फीसदी बढ़कर 74,573 यूनिट पर पहुंच गई। यह इशारा करता है कि छोटे कारोबारी परिवहन और लोकल कमर्शियल मोबिलिटी में भी मांग लौट (Utility Vehicle Growth India) रही है।

कुल मिलाकर फरवरी का डेटा ऑटो सेक्टर के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है, लेकिन उद्योग की नजर अब भी वैश्विक हालात पर टिकी हुई है। अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबा खिंचता है, तो उसका असर आने वाले महीनों में लागत, सप्लाई और निर्यात पर पड़ सकता है।

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