Tiger Skin Smuggling: दो बाघों की खाल और 13 मूंछों के साथ अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार

टाइगर स्किन स्मगलिंग (Tiger Skin Smuggling) के खिलाफ कांकेर वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के एंटी-पोचिंग दल ने आपरेशन सेफ पैसेज (Operation Safe Passage) के तहत वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और राज्य स्तरीय उड़नदस्ता के साथ संयुक्त कार्रवाई कर महाराष्ट्र के दो अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से दो बाघों की खाल, 13 मूंछें, एक मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपितों ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों के शिकार की बात स्वीकार की है।

वन विभाग को गोपनीय सूचना मिली थी कि महाराष्ट्र सीमा से बाघ के अंगों की तस्करी कर उन्हें छत्तीसगढ़ लाया जा रहा है। सूचना मिलते ही वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन के निर्देशन में संयुक्त टीम गठित की गई। कार्रवाई में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वाड, उपवनमंडलाधिकारी रायपुर तथा पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल के अधिकारियों को शामिल किया गया।

29 जून की आधी रात करीब 12 बजे पश्चिम बांदे वन परिक्षेत्र के पीव्ही-78 जनकपुर चौक से पखांजूर मार्ग पर घेराबंदी की गई। इसी दौरान मोटरसाइकिल क्रमांक एमएच-33-एजे-3872 से आ रहे दो संदिग्धों को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी में उनके पास से दो बाघों की खाल और 13 मूंछें बरामद हुईं। इसके बाद दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

गढ़चिरौली के रहने वाले हैं आरोपित Tiger Skin Smuggling

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के आहेरी थाना क्षेत्र निवासी 37 वर्षीय बाबूराव मडावी और 38 वर्षीय बिजेश्वर गेडाम के रूप में हुई है। पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे बाघ की खाल बेचने के लिए पखांजूर की ओर आ रहे थे। बरामद खाल और मूंछों को फोरेंसिक जांच के लिए रायपुर भेजा गया है।

भानुप्रतापपुर पश्चिम वनमंडल के डीएफओ नवीन कुमार ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपितों ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों के शिकार की बात स्वीकार की है। शिकार के बाद खाल को महाराष्ट्र के रास्ते छत्तीसगढ़ लाया जा रहा था।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व से जुड़ा हो सकता है मामला

वन विभाग को आशंका है कि जब्त की गई दोनों खाल इंद्रावती टाइगर रिजर्व और अबूझमाड़ क्षेत्र में शिकार किए गए बाघों की हैं। यह इलाका गढ़चिरौली, इंद्रावती, अबूझमाड़, उदंती-सीतानदी और सुनाबेड़ा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारा है, जहां बाघ समेत कई दुर्लभ वन्यजीवों की आवाजाही होती है। आरोपितों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। जब्त वन्यजीव अवशेष, मोटरसाइकिल और दोनों मोबाइल फोन शासकीय सुपुर्दगी में ले लिए गए हैं। 30 जून को दोनों आरोपितों को भानुप्रतापपुर न्यायालय में पेश कर रिमांड पर भेज दिया गया।

अंतर्राज्यीय नेटवर्क पर बड़ी चोट

वन विभाग ने इस कार्रवाई को अंतर्राज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता बताया है। विभाग का कहना है कि वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध शून्य सहनशीलता की नीति के तहत लगातार अभियान चलाया जाएगा। मामले से जुड़े अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद बाघों की उम्र और शिकार के समय की भी पुष्टि हो सकेगी।

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