एक प्रसिद्ध इन्वेस्टर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर जनरल कैटेगरी के युवाओं को सलाह दी है कि वे विदेश चले जाएं। जहां उनका भविष्य उज्जवल हो सकता है। (The Growing Threat of Brain Drain) उन्हें उनकी काबलियत के आधार पर अच्छी सेलरी और बेहतरीन नौकरी मिल सकती है। यूएई, थाईलैंड और जापान सहित कई यूरोपीय देशों में भारतीय हुनरमंद युवाओं के लिए अच्छा अवसर उनकी प्रतीक्षा कर रहा है। ऐसे में यदि जनरल कैटेगरी के किसी युवा को विदेश में नौकरी का अवसर मिलता है तो उन्हें बगैर सोचे समझे विदेश का रूख अख्तियार कर लेना चाहिए क्योंकि भारत में वोटबैंक की राजनीति के चलते आरक्षण व्यवस्था कभी खत्म नहीं होगी। चाहे किसी भी पार्टी की सरकार बन जाए वह आरक्षण व्यवस्था को समाप्त नहीं करेगी। इसके विपरीत आगे चलकर स्थिति और जटिल हो जाएगी।
उक्त इन्वेस्टर की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया में नई बहस छिड़ गई है। जहां ज्यादातर जनरल कैटेगरी के लोग उनकी बात का समर्थन करते हुए कह रहे हैं कि वाकई अब इस देश में जनरल कैटेगरी के युवाओं का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है इसलिए उन्हें बेहतर भविष्य के लिए आंख मूंदकर विदेश पलायन कर लेना चाहिए। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह निराशावादी सोच का परिचायक है। यहां की प्रतिभाओं को अपने देश में ही रहकर चुनौतियों का सामना करना चाहिए और अपनी मातृभूमि की सेवा कर इस माटी का कर्ज चुकाना चाहिए।
यहां पर प्रश्न यह उठता है कि यदि आरक्षण के चलते जनरल कैटेगरी (The Growing Threat of Brain Drain) की प्रतिभाओं को उपेक्षा का दंश झेलना पड़ेगा तो उनके सामने और विकल्प ही क्या बचेगा? इस समय भी लाखों भारतीय युवा विदेशों में अपनी सेवा दे रहे हैं और अच्छा वेतन प्राप्त कर खुशहाल जीवन जी रहे हैं। हाल ही में अमेरिका की विभिन्न नामी गिरामी कंपनियों में कार्यरत सैंकड़ों भारतीय मूल के युवाओं ने यूरोपीय देशों का रुख किया है जहां उन्हें और अच्छा पैकेज मिला है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका में एच- 1 बी बीजा के लिए सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। अमेरिका में अब एच-1 बी वीजा की फीस बढ़ाकर एक लाख डालर कर दी गई है।
नतीजतन भारतीय पेशेवर यूरोपीय देशों की ओर कूच कर रहे हैं। जाहिर है यूरोपीय देशों में अच्छे अवसर हैं। ऐसे में भारत में आरक्षण को लेकर चलते विवाद के बीच जनरल कैटेगरी की युवा प्रतिभाओं के पलायन (The Growing Threat of Brain Drain) का खतरा बढ़ता जा रहा है। यदि काबिल शिक्षा विद्, डाक्टर, साफ्टवेयर इंजीनियर आदि विदेश पलायन करने लगेंगे तो देश का क्या होगा? जो भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और विश्वगुरु बनने का सपना संजो रहा है उस सपने का क्या होगा? इन यक्ष प्रश्नों का उत्तर ढूंढना होगा और सरकार को इस बात पर गंभीरता पूर्वक चिंतन और मनन करना होगा कि भारत से प्रतिभाओं का पलायन कैसे रोका जाए?
यदि प्रतिभाओं का पलायन रोकने प्रभावी पहल नहीं की गई और समय रहते कारगर कदम नहीं उठाए गए तो लम्हों की इस खता की सजा सदियों को भुगतनी पड़ सकती है।
