मध्यप्रदेश की एक पूर्व कांग्रसी पार्षद ने लाडली बहन योजना के खिलाफ हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करके इस पर रोक लगाने की मांग कर नया विवाद छेड़ दिया है। उक्त याचिका को स्वीकार्य करते हुए हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि मध्यप्रदेश की लगभग सवा करोड़ महिलाओं को हर माह लाडली बहन योजना के अंतर्गत डेढ़ हजार रूपये दिये जाते हैं जो सीधे सीधे महिला मदताओं को प्रलोभन परोसने के समान है।
इस तरह की मुफ्तखोरी को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर रोक लगनी चाहिए। हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद जहां भाजपा के नेता कांग्रेस की उक्त पूर्व महिला पार्षद पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने इस तरह की याचिका लगाकर महिलाओं को मिलने वाली सम्मान निधि को रोकने का कुत्सित प्रयास किया है क्योंकि कांग्रेस हमेशा से महिला सशक्तिकरण की विरोधी रही है। वहीं दूसरी ओर बहुत से लोग इस याचिका का समर्थन कर रहे हैं जिनका कहना है कि इस तरह की कितनी भी मुफ्तखोरी को बढ़ावा देने वाली योजनाएं चलाई जा रही हैं उन सब पर रोक लगनी चाहिए।
इसकी जगह उक्त राशि से महिलाओं के हित में कोई रोजगार परक योजना क्रियान्वित की जानी चाहिए ताकि जरूरतमंद महिलाओं (Petition against the Ladli Behna Yojana) को रोजगार सुलभ हो। उल्लेखनीय है कि पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने भी इन मुफ्तखोरी को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को लेकर तल्ख टिप्पणी की थी और कहा था कि फ्री रेवड़ी कल्चर देश के हित में नहीं है इस पर रोक लगाने सरकार को विचार करना चाहिए किन्तु आज तक इस पर रोक नहीं लगी है सभी राजनीति पार्टियां वोट कबाडऩे के लिए फ्री रेवड़ी कल्चर को अपना रही हैं अब इस याचिका के बाद इस मुद्दे पर फिर से नई बहस शुरू हो गई है देखना होगा कि लाडली बहन योजना के खिलाफ दायर की गई याचिका पर हाईकोर्ट क्या फैसला देता है।
