संपादकीय: विकृत न हो होली का स्वरूप

The form of Holi should not be distorted

The form of Holi should not be distorted

Editorial: हमारा देश भारत पर्व प्रधान देश है। विश्व में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां अनगिनत पर्व मनाए जाते हैं। ये सभी धार्मिक पर्व समाज को एकता के सूत्र में बांधते हैं। आपसी भाईचारा बढ़ाते हैं। ये पर्व हमारी प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं तथा नैतिक मूल्यों को अक्षुण्ण बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। ये सभी पर्व न सिर्फ हमें भावनात्मक सुरक्षा देते हैं बल्कि आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसा ही एक प्रमुख पर्व है होली। जो उत्साह और उमंगो का अनूठा रंग पर्व है। इस दिन सब रंगों से सराबोर होकर यह संदेश देते हैं कि हम सब एक समान हैं।

अन्य धार्मिक पर्वों की तरह ही होली पर्व भी हमें एकजुटता का संदेश देता है और इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। इसके पीछे दंतकथा है कि भक्त प्रहलाद की भगवान की भक्ति से क्रोधित होकर उसके पिता हिरण्यकश्यप उसकी हत्या करने के लिए उसे अपनी बहन होलिका की गोद में बिठाकर उनका दहन कराते हैं। होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी लेकिन वह जलकर भस्म हो जाती है और भक्त प्रहलाद बच जाते हैं।

तभी से होली को बुराई पर अच्छाई की विजय के रुप में हर्षोल्लास पूर्वक मनाने की परंपरा चली आ रही है। किन्तु पिछले कुछ समय से इस पावन पर्व होली का स्वरूप विकृत होता जा रहा है। जो गहन चिंता का विषय है। यह ठीक है कि यह उत्साह उमंग और मस्ती का त्यौहार है लेकिन होली की हुड़दंग के नाम पर मर्यादा की सारी सीमाएं लांघना कतई उचित नहीं है। इस दिन नशा करके जो लोग अति करते हैं वे इस पर्व की गरिमा को खंडित करते हैं।

होली पर्व पर तो आपसी दुश्मनी भूलाकर एक दूसरे से गले मिलने की परंपरा रही है लेकिन अब अराजक तत्व तो होली के दिन दुश्मनी भंजाने के मौके तलाशते हैं। नतीजतन गाली गलौज, मारपीट और यहां तक कि खून खराबे की भी नौबत आ जाती है। होली के दिन इतनी अप्रिय घटनाएं होने लगी हैं कि सभ्य और शांति प्रिय लोग होली के दिन घर से बाहर निकलना भी मुनासिब नहीं समझते।

ऐसे में इस पर्व का मूल उद्देश्य ही प्रभावहीन हो जाता है कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। होली के स्वरूप को विकृत होने से बचाना हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। अन्यथा आने वाले कुछ समय बाद होली पर्व की गरिमा नष्ट हो सकती है। होली आपसी प्रेम और भाईचारे का पर्व है। इसे हर्ष और उल्लास के साथ मनाएं लेकिन मर्यादा की लक्ष्मण रेखा न लांघे। बुराई का नाश हो, अच्छाई का प्रकाश हो, होली में सबके दुख दर्द का विनाश हो। इसी मंगल कामना के साथ समस्त पाठकों और देशवासियों को इन्द्रधनुषी रंगों के पावन पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं।