संपादकीय: उत्तर प्रदेश के विभाजन का चुनावी शिगूफा

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने यूपी विधानसभा चुनाव (The Electoral Ploy to Divide Uttar Pradesh) के पहले फिर एक बार देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के विभाजन की बात कर नई बहस छेड़ दी। ओमप्रकाश राजभर हर चुनाव के दौरान ऐसी बात कहते रहे हैं। इस बार उन्होंने एक नई बात यह कही है कि यदि उत्तर प्रदेश का विभाजन होता है और चार नये राज्य हरित प्रदेश, अवध प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वांचल प्रदेश बनते हैं तो इनमें से एक नवगठित प्रदेश का मुख्यमंत्री राजभर जाति का ही बनेगा।

इससे स्पष्ट है कि यह सिर्फ एक चुनावी शिगूफा है। गौरतलब है कि वर्ष 2000 में तात्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों का विभाजन कर उत्तराखण्ड, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया था। इसके बाद भी उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग समय-समय पर उठती रही है। इसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि छोटे राज्यों का तेजी से विकास होता है। इसके लिए छत्तीसगढ़ का उदाहरण दिया जाता है जिसने पिछले 25 सालों में वाकई प्रगति के नित नये सोपान तय किए हैं।

किंतु झारखंड और उत्तराखंड का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। वैसे भी देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश विकास के मामले में किसी से पीछे नहीं है। फिर भी उसके विभाजन की मांग उठती रही है। पूर्व में बसपा सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रही मायावती भी उत्तर प्रदेश को चार भागों में विभक्त करने की जरूरत पर जोर दे चुकी हैं और अब ओमप्रकाश राजभर यह मांग उठा रहे हैं।

जिस पर भाजपा ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अलबत्ता कांग्रेसी सांसद इमरान मसूद ने व्यक्तिगत रुप से यूपी के विभाजन की मांग का समर्थन किया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि उत्तरप्रदेश के विभाजन का यह शिगूफा आगामी यूपी विधानसभा चुनाव (The Electoral Ploy to Divide Uttar Pradesh) में क्या रंग लाता है?

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