सूखे जलाशय ने छीना आशियाना, गिधवा-परसदा से रूठे परिंदे

पक्षी विहार में जल संकट, स्थानीय पक्षी भी छोड़ रहें साथ, प्रशासनिक लापरवाही से बिगड़ रही सूरत
दिनेश दुबे बेमेतरा
बेमेतरा/नवप्रदेश। (The dried reservoir snatched away their home) प्रदेश का प्रथम पक्षी विहार गिधवा परसदा में जिस अनुकूलता के चलते सात समंदर पार कर प्रवासी पक्षी आते हैं उस स्थान पर आज जल संकट के चलते स्थानीय पक्षी भी पलायन को मजबूर हैं, गिधवा में जल संसाधन विभाग के दोनो जलाशय में पर्याप्त पानी आसपास के गांवो के तालाबों में जल भराव के चलते विदेशी परिंदे इस गांव में न केवल प्रवासी बनकर आते हैं बल्कि, कुछ प्रजाति तो तीन दशक से वतन नही लौटे, पानी की उपलब्धता से इन्हे मिलने वाले खुराक के कारण इस स्थान चयन पक्षियों ने किया अब पानी ने जवाब दे दिया है जो कुछ बचा है उसमें मछली पकडऩे वाले कीचड़ में खुराक तलाश रहे हैं।
जल संरक्षण में फेल
बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लाक में स्थित पक्षी विहार में जल संरक्षण करने में प्रशासन फेल है, ढाई दशक में एक अदद जलाशय का निर्माण नही हो सका नतीजा यह कि फरवरी में जिस स्थान पर पर्यटक आते थे आज वीरान है, वन विभाग की निगरानी में ग्राम नगधा में बने आर्टिफिशियल पक्षी ही मौजूद है बाकी पानी की तलाश में पलायन कर गए हैं, 9 दिसंबर को वन मंत्री एवम खाद्य मंत्री दोनो की उपस्थिति में वर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर का लोकार्पण हुआ वर्ड सफारी का शुभारंभ हुआ, वन मंत्री ने जैव विविधता के लिए प्रेरित किया ,खाद्य मंत्री ने उल्पब्धी को क्षेत्र का सपना पुरा होना बताया था, वर्तमान तस्वीर देखकर लगता है कि सपना सूखता भी है, जिस स्थान पर 277 प्रकार के पक्षी विचरण करने आते हैं वहा पर जल संरक्षण की कोई दीर्घकालिक योजना नही होना यही बताता है कि वह फोटो सूट कराने का केवल ठिकाना बनकर रह गया है, दो जनवरी को बेमेतरा कलेक्टर भी इस सेंटर में पहुंचकर जिले के गौरव को करीब से देखा है, अब जरूरत है इस स्थान को संवारने की जिस पर ठोस रणनीति नहीं है।
शिवनाथ ही सहारा
पक्षी विहार को बचाने के लिए एक मात्र सहारा शिवनाथ ही है नाद घाट में बैराज बनाकर न केवल एक लाख आबादी को शुद्ध पेयजल आपूर्ति की जा सकती है बल्कि संबलपुर तक लिफ्ट कर एक दर्जन से अधिक जलाशय को भरा जा सकता है, गिधवा, नगधा कुरा, एरम सही खेड़ा, सहित सभी गांवो मे बरसाती पानी को मामूली प्रयास से पहुंचाया जा सकता है, बीस किलोमीटर के एरिया में तालाबों से जल दोहन एवम मछली पकडऩे पर प्रतिबंध लगना चाहिए, यदि किसी भी प्रयास में कमी रही तो जैसे गौ अभ्यारण का तमगा हटा उसी तरह पक्षी विहार भी किताब के पन्नों से बेदखल हो जाएगा।
भूजल पीने योग्य नहीं
ग्राम नगधा में लोग चाहकर भी भूजल से तालाब एवम अन्य डबरी में पानी नहीं भर सकते, ग्रामीणों की माने तो पानी में खारा पन अधिक होने के कारण लोग दाल पकाने नल की पानी लेने पड़ोस के गांव कुरा जाते है, जो लोग भूजल का उपयोग नियमित करते हैं वे किसी न किसी प्रकार की बीमारी से जूझ रहे हैं, इस गांव को शुद्ध जल प्रदाय करने अमलडीहा प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है जिसे पूर्ण होने में अभी समय लगेगा, खारा पानी पक्षियों के लिए कितना नुकसानदायक है इसे वन विभाग जानें पर लोग उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब गांव की पानी से दाल गले।



