छत्तीसगढ़

Amit Jogi Surrender : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को सरेंडर का अल्टीमेटम

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा मोड़ (Amit Jogi Surrender) आया है। हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी रहे अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति और कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

कोर्ट की सख्ती, अब नहीं मिलेगी राहत (Amit Jogi Surrender)

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने साफ संकेत दिया कि अब इस केस में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश जारी करते हुए कहा कि अमित जोगी को निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

2003 का चर्चित मर्डर केस

यह मामला साल 2003 में हुए राम अवतार जग्गी हत्याकांड से जुड़ा है, जिसने पूरे छत्तीसगढ़ में सनसनी फैला दी थी। 4 जून 2003 को जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो ने सरकारी गवाह बनकर केस को नई दिशा दी थी।

निचली अदालत से हाईकोर्ट तक का सफर

साल 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी करार (Amit Jogi Surrender) देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। इसके बाद मृतक के बेटे ने फैसले को चुनौती दी और मामला सुप्रीम कोर्ट होते हुए हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अब यह अंतिम चरण में है।

राजनीतिक जुड़ाव भी बना चर्चा का कारण

राम अवतार जग्गी की पहचान सिर्फ एक कारोबारी के रूप में नहीं थी, बल्कि वे राजनीति में भी सक्रिय थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे और एनसीपी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके थे।

फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब प्रदेश में राजनीतिक चर्चाएं तेज (Amit Jogi Surrender) हो गई हैं। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है और अंतिम फैसला क्या होता है।

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