Bilaspur High Court Kotwar Case : कोटवार नियुक्ति पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, राजस्व मंडल के आदेश को बताया सही

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गांव में कोटवार की नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला (Bilaspur High Court Kotwar Case) सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व कोटवार के निकट संबंधी को नियुक्ति में वरीयता देना अनिवार्य नहीं है। हाईकोर्ट ने राजस्व मंडल के आदेश को सही ठहराते हुए याचिकाकर्ता की रिट याचिका खारिज कर दी।
मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकल पीठ में हुई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि छत्तीसगढ़ भूमि राजस्व संहिता 1959 की धारा 230 के तहत कोटवार की नियुक्ति वैधानिक नियमों से नियंत्रित होती है। नियम 4(2) के अनुसार पूर्व कोटवार के निकट संबंधियों को वरीयता देना विवेकाधीन है और इससे किसी प्रकार का कानूनी अधिकार उत्पन्न नहीं होता।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता परदेशी राम के पिता खेलन दास पनिका ग्राम गनियारी में कोटवार के पद पर कार्यरत (Bilaspur High Court Kotwar Case) थे। वर्ष 2010 में उनके निधन के बाद इस पद को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। ग्राम पंचायत ने परदेशी राम की सिफारिश की थी, लेकिन तहसीलदार ने लक्ष्मण सिंह को कोटवार नियुक्त कर दिया।
बाद में लक्ष्मण सिंह के निधन के बाद फिर से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान परदेशी राम और रामबिहारी साहू ने आवेदन किया। सक्षम प्राधिकारी ने रामबिहारी साहू को कोटवार नियुक्त कर दिया, जिसे याचिकाकर्ता ने विभिन्न स्तरों पर चुनौती दी।
मामला एसडीएम, आयुक्त और अंततः राजस्व मंडल तक पहुंचा। राजस्व मंडल ने याचिका खारिज करते हुए रामबिहारी साहू की नियुक्ति को वैध ठहराया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कोटवार की नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है और निकट संबंधी को केवल तब वरीयता मिलती है जब अन्य परिस्थितियां समान हों।
कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज थे और उसके चरित्र को लेकर (Bilaspur High Court Kotwar Case) भी शिकायतें थीं। वहीं चयनित उम्मीदवार रामबिहारी साहू के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और वह अधिक शिक्षित भी था।
अदालत ने यह भी कहा कि कोटवार का पद सरकारी पद है और नियुक्ति केवल पात्रता और उपयुक्तता के आधार पर ही की जा सकती है। पारिवारिक संबंध के आधार पर नियुक्ति का कोई स्वतः अधिकार नहीं बनता।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहा कि राजस्व अधिकारियों के निर्णय में कोई कानूनी त्रुटि या अवैधता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन (Bilaspur High Court Kotwar Case) नहीं हुआ है। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने रिट याचिका को खारिज कर दिया और राजस्व मंडल द्वारा रामबिहारी साहू की नियुक्ति को वैध ठहराया।



