छत्तीसगढ़

Chhind Jaggery Women Empowerment : छिंद के पेड़ों से बदल रही दीदियों की किस्मत

सुकमा जिले के वनांचल क्षेत्र में छिंद के पेड़ों से मिलने वाले रस को अब केवल पेय के रूप में उपयोग करने की सीमित (Chhind Jaggery Women Empowerment) सोच बदल रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में “नियद नेल्ला नार” कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ने छिंद के रस से गुड़ (जागरी) बनाने की अभिनव पहल शुरू की है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि और आत्मनिर्भरता की नई दिशा सामने आ रही है।

https://youtu.be/RE8PTahGt3Q

सुकमा के कोंटा विकासखंड के ग्राम सामसेट्टी में इस पहल को दंतेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की 10 दीदियों ने अपनाया। दंतेवाड़ा से आए विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर, उन्होंने छिंद के रस को गुड़ में बदलने की प्रक्रिया सीख ली है। इस प्रक्रिया में स्थानीय संसाधनों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर उत्पाद की गुणवत्ता और पैकेजिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

यह पहल विशेष रूप से उन ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी आजीविका मुख्यतः धान की खेती और लघु वनोपज संग्रहण पर निर्भर थी। धान की एकमात्र फसल होने के कारण वर्ष के बाकी समय रोजगार के अवसर सीमित रहते थे। छिंद गुड़ निर्माण ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है।

इस गतिविधि से प्रति परिवार औसतन 6 से 7 हजार रुपये अतिरिक्त मासिक आय होने का अनुमान है। बाजार में औषधीय गुणों से भरपूर छिंद गुड़ की कीमत लगभग 350 रुपये प्रति किलोग्राम है, जिससे यह उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में सहायक साबित हो रहा है।

“नियद नेल्ला नार” योजना के तहत इस पहल से महिलाओं के कौशल विकास के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। सामसेट्टी की दीदियों की सफलता ने अन्य महिलाओं को भी इस गतिविधि से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। छिंद के पेड़ अब केवल जंगल की पहचान नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी बन रहे हैं।

https://youtu.be/Q4JpTYnIrkM

इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय संसाधनों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार से जोड़कर ग्रामीण विकास को स्थायी रूप दिया जा सकता है। छिंद की मिठास अब सुकमा की नई पहचान बन रही है और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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