Chhattisgarh High Court Verdict : 25 साल पुराने घोटाले में बड़ा उलटफेर! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को किया बरी

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित फर्जी वेतन घोटाले में बड़ा न्यायिक फैसला सामने (Chhattisgarh High Court Verdict) आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने करीब ढाई दशक पुराने मामले में सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती।
क्या था पूरा मामला (Chhattisgarh High Court Verdict)
यह मामला जगदलपुर के स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा था, जहां 1979 से 1985 के बीच फर्जी वेतन बिल बनाकर सरकारी राशि निकालने का आरोप था। आरोप था कि कुछ कर्मचारियों के नाम पर फर्जी भुगतान दिखाकर करीब 42 हजार रुपये का गबन किया गया।
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा
जगदलपुर की विशेष अदालत ने वर्ष 2002 में इस मामले में आरोपियों को दोषी मानते हुए IPC की कई धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 2-2 साल की सजा (Chhattisgarh High Court Verdict) सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने क्यों पलटा फैसला
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह असफल रहा।
किसी भी आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत पेश नहीं किए गए
फर्जी हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान का कोई विशेषज्ञ प्रमाण नहीं मिला
कई दस्तावेज मूल के बजाय केवल कार्बन कॉपी थे
गवाहों के बयान भी स्पष्ट और मजबूत नहीं थे
अधीनस्थ कर्मचारियों की भूमिका पर टिप्पणी
कोर्ट ने यह भी माना कि कई आरोपी केवल अपने वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर काम कर रहे थे और उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र आपराधिक मंशा साबित नहीं हुई।
“संदेह सजा का आधार नहीं”
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि चाहे संदेह कितना भी मजबूत (Chhattisgarh High Court Verdict) क्यों न हो, वह कानूनी सबूत का विकल्प नहीं हो सकता। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त कर सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
आगे क्या
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जो आरोपी जमानत पर हैं, उनके बांड अगले 6 महीने तक प्रभावी रहेंगे।



