High Court Verdict India Tender : टेंडर नियमों पर हाई कोर्ट सख्त: बैंक गारंटी में चूक पर कंपनी की याचिका खारिज

छत्तीसगढ़ में सरकारी टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक अहम फैसला सामने (High Court Verdict India Tender) आया है। Chhattisgarh High Court की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कर दिया है कि टेंडर में निर्धारित शर्तों का पालन अनिवार्य है, खासकर बैंक गारंटी की वैधता को लेकर किसी भी प्रकार की ढील स्वीकार्य नहीं होगी।
क्या था पूरा मामला (High Court Verdict India Tender)
मामला एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) के निर्माण से जुड़े टेंडर (High Court Verdict India Tender) का है, जिसमें WAPCOS Limited द्वारा एक ठेका कंपनी की बिड को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता कंपनी मेसर्स रामशरण सिंह प्रोजेक्ट्स LLP ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बैंक गारंटी बनी विवाद की वजह
टेंडर की शर्तों के अनुसार, बिड के साथ दी जाने वाली बैंक गारंटी को अंतिम बिड वैधता अवधि के बाद 45 दिनों तक वैध होना जरूरी था, लेकिन याचिकाकर्ता कंपनी द्वारा जमा की गई बैंक गारंटी 18 अक्टूबर 2025 तक ही मान्य थी, जबकि इसे 4 जनवरी 2026 तक वैध होना चाहिए था। इसी आधार पर कंपनी की बिड को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
कोर्ट ने क्या कहा
डिवीजन बेंच, जिसमें Ramesh Sinha और Ravindra Kumar Agrawal शामिल (High Court Verdict India Tender) थे, ने अपने फैसले में कहा कि टेंडर प्रक्रिया में तय शर्तों का पालन अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह टेंडरिंग अथॉरिटी के फैसलों में तब तक हस्तक्षेप नहीं करेगा, जब तक वे मनमाने या अवैध साबित न हों।
याचिकाकर्ता की चूक खुद बनी वजह
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता कंपनी खुद यह स्वीकार कर चुकी थी कि वह निर्धारित अवधि तक वैध बैंक गारंटी देने में असफल रही। कोर्ट ने माना कि यह टेंडर की अनिवार्य शर्त का उल्लंघन है और ऐसे में बिड को अयोग्य ठहराना पूरी तरह उचित है।
याचिका खारिज, फैसला बरकरार
हाई कोर्ट ने पाया कि टेंडर मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की मनमानी या दुर्भावना (High Court Verdict India Tender) नहीं थी। इसी आधार पर कंपनी की रिट याचिका को खारिज कर दिया गया और टेंडरिंग अथॉरिटी के फैसले को सही ठहराया गया।
क्या संदेश देता है यह फैसला
यह फैसला साफ संकेत देता है कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी शर्तों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बैंक गारंटी जैसी अनिवार्य शर्तों में छोटी सी चूक भी पूरी बिड को खारिज करवा सकती है।



