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Papa Rao Biyala biography : UN से लेकर बॉलीवुड तक…IAS पापा राव बियाला की वो कहानी…जिसने साबित कर दिया कि जुनून कभी रिटायर नहीं होता…

नई दिल्ली, 28 मई| Papa Rao Biyala biography : जहां करोड़ों युवा IAS बनने का सपना देखते हैं, वहीं कुछ लोग होते हैं जो इस प्रतिष्ठित सेवा को छोड़कर एक नया रास्ता चुनते हैं—और वो भी फिल्मी दुनिया जैसा अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र। यह कहानी है पापा राव बियाला की, जिनकी जिंदगी ने दिखाया कि पैशन सिर्फ करियर नहीं, पहचान भी बनाता है।

IAS से फिल्म निर्देशक बनने का उनका सफर ना सिर्फ प्रेरक (Papa Rao Biyala biography)है, बल्कि यह भी बताता है कि ‘सिस्टम‘ को भीतर से जानने वाला जब ‘स्क्रीन’ पर अपनी बात कहता है, तो वह सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक संदेश भी बन जाता है।

एक अनोखा प्रशासनिक करियर

1982 बैच के IAS अधिकारी पापा राव बियाला ने गृह सचिव (असम), नीति सलाहकार (तेलंगाना सरकार), और UN मिशन (कोसोवो) जैसे अहम पदों पर सेवाएं दीं।

UN में उनकी भूमिका ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक गहराई का अनुभव (Papa Rao Biyala biography)दिया।

उन्हें कैबिनेट मंत्री के समकक्ष रैंक तक हासिल हुआ।

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सिनेमा की ओर पहला कदम

साल 1996 में New York Film Academy से फिल्म निर्माण का डिप्लोमा लिया।

पहली शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री ‘Willing to Sacrifice’ ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता।

फिल्म के जरिए पर्यावरण जैसे गंभीर विषय को दर्शकों तक (Papa Rao Biyala biography)पहुंचाया।

‘Music School’ से फीचर फिल्म में एंट्री

2023 में ‘Music School’ रिलीज़ हुई, जिसमें शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के क्रिएटिव एक्सप्रेशन पर सवाल उठाए गए।

श्रिया सरन और शरमन जोशी जैसे कलाकारों के साथ बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भले सफल न रही, पर समीक्षकों ने खूब सराहा।

फिल्म की थीम बच्चों पर शिक्षा के बोझ और रचनात्मकता की कमी को उजागर करती है।

पापा राव बियाला की सोच

“प्रधानमंत्री की यात्रा या आपदा प्रबंधन जितना जटिल प्रशासनिक कार्य भी मैं कर चुका हूं, लेकिन फिल्म बनाना उससे अलग नहीं—यह भी उतना ही डिटेल और प्लानिंग मांगता है।” – पापा राव बियाला

https://www.youtube.com/watch?v=G1ZDNhRM1ac

आने वाले प्रोजेक्ट्स और उम्मीदें

फिलहाल उनकी अगली फिल्म की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बियाला बड़े पर्दे पर फिर से लौटने के लिए तैयार हैं।

अब वह फुल-टाइम फिल्म निर्माता हैं और सामाजिक मुद्दों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने पर फोकस कर रहे हैं।

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