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खबरों की मरम्मत: बड़ी प्रशासनिक सर्जरी और सामाजिक चेतना, विधायक पर चढ़ा सत्ता का नशा

बड़ी प्रशासनिक सर्जरी और सामाजिक चेतना

साय सरकार में लम्बे समय बाद हुई बड़ी प्रशासनिक सर्जरी से नौकरशाही में कही खुशी कही गम का माहौल हैं। 2012 बैच की आईएएस अफसर सुश्री पुष्पा साहू का एक दिनी बदलाव सामाजिक और राजनीतिक बवंडर ले आया। एक दिन पहले कोरिया की कलेक्टर बनाई गई पुष्पा साहू को 24 घंटे के अन्दर ही वापस राजधानी ले आया गया। उनकी जगह 2016 बैच की रोक्तिमा यादव को पोस्ट किया गया है। अब सामाजिक या राजनीतिक चेतना का आलम ये है कि पहले कांग्रेस और फिर आम आदमी पार्टी (प्रदेश अध्यक्ष) से होते हुए भाजपा की दहलीज पर खड़े गोपाल साहू ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पुष्पा साहू की पोस्टिंग बदलने को साहू समाज की उपेक्षा कहा हैं। शायद गोपाल साहू को नहीं मालूम कि रोक्तिमा यादव भी पूर्व प्रांत संघ चालक बिसराराम यादव परिवार से हैं और उनके बेटे गजेन्द्र यादव अभी केबिनेट मंत्री है। और फिर प्रशासनिक व्यवस्था का अपना प्रोटोकाल तो है ही। वैसे भी रोक्तिमा यादव के एक बैच बाद 2017 बैच के चार डायरेक्ट आईएएस रोहित व्यास जशपुर, मयंक चतुर्वेदी रायगढ़, अमित कुमार दन्तेवाड़ा और कुणाल दुधावत कोंडागांव में पिछले एक साल से कलेक्टर हैं। सो प्रशासनिक दृष्टि के बदलाव स्वीकार्य होना चाहिए।

कही खुशी कही गम

ऐसा नहीं है कि नौकरशाही के इस भारी भरकम बदलाव से सब खुश ही है, कुछ को गम भी है लेकिन गम-ए-इजहार नहीं हो सकता सो स्वीकार्य है। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी कलेक्टर को नगर निगम का कमिश्नर बनाया हो। बीजापुर कलेक्टर रहे सम्बित मिश्रा(2018) और रायपुर नगर निगम कमिश्नर रहे विश्वजीत (2019) को एक दूसरे से अदला बदली की गई। इसे बदलाव का नवाचार भी कह सकते है। बदलाव के तौर पर देखें तो पहली बार ऐसा हो रहा है कि आदेश जारी होने के बाद वापस भी हो रहे हैं। मसलन पिछले दिनों शासकीय कर्मियों को सामाजिक, राजनीतिक संगठनों में सक्रिय भागीदारी को लेकर निकला आदेश 24 घंटे में वापस हुआ। कमोबेश ऐसा ही पुष्पा साहू के लिए निकला कलेक्टर का आदेश 24 घंटे में रिवर्स हुआ। इससे यह तो साबित होता है कि सरकार बेहिचक अपनी त्रुटि मानकर जनअपेक्षाओ के अनुसार बदलाव कर लेती है। बहरहाल 43 अफसरों के जम्बो बदलाव से कही खुशी कही गम का माहौल है।

लेफ्ट राईट, लेफ्ट राईट, लेफ्ट राईट, जीत बंगाल में जश्न छत्तीसगढ़ में

बंगाल की जीत का जश्न छत्तीसगढ़ में मनाया जा रहा हैं। वैसे तो पूरे देश का राईट विंग इस जीत का जश्न मना रहा हैं। जब चुनाव बंगाल में हो तो लेफ्ट-राईट होना स्वाभाविक ही था। लेफ्ट की जमीन पर राईट का कब्जा होने पर जश्न तो बनता ही है। छत्तीसगढ़ से सत्ता और संगठन के 90 फीसदी नेता मंत्री कार्यकर्ता बंगाल में महिनों से जान हथेली पर लेकर डटे रहे और गाहे बगाहे सभा, बैठकों और अन्य राजनीतिक गतिविधियों के फोटो वीडियों सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहे। लेकिन इन सबके बीच भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल सन्तोष की बैठक का वह वीडियों खूब वायरल रहा, जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं से हामी भरवाई कि डेमोक्रेसी मिडिल लाईन पर चलती हैं। स्ट्रीम लाईन को एक्सेप्ट नहीं करती। और वो मीडिल लाईन जनता का कल्याण हैं चाहे विधा कोई भी हो। सो उनका कहना है कि मीडिया में हमें कभी-कभी राईट विंग बोलते है वो हम नहीं है, क्योकि कभी हिटलर राईट विंगर था, हम नेशनलिस्ट है, राष्ट्रवादी है और आप चाहे तो इस शब्द को बंगाली में बता सकते हो। बीएल सन्तोष के उर्जा से भरे इस ओजस्वी बौद्धिक संबोधन का असर चुनाव परिणाम के रूप में धरातल पर दिखा भी। किसी भी विंग के बुद्धिजीवि को यू-ट्युब पर जाकर बीएल संतोष का ये भाषण सुनना चाहिए। बहरहाल छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन बंगाल की जीत का जश्न मना रही है और हर दूसरा, तीसरा मंत्री, कार्यकर्ता एक दूसरे और, तीसरे से अपने अनुभव शेयर कर रहा हैं।

एनएच अफसरों के फूलने लगे हाथ-पांव

राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग का नया कारनामा सामने आया है। अब तक पुल और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में गड़बड़ घोटाले की कालिख एनएच के अफसरों पर लगती रही है। लेकिन अब लापरवाही की नई मिसाल पेश कर दी गई है। धमतरी से जगदलपुर जाने के लिये केशकाल घाटी के लिये बायपास मार्ग तैयार करने 8 हजार से ज्यादा पेड़ कांटे गए हैं। हजारों पेड़ों की कटाई के बाद पता चला कि बायपास दूसरी जगह से होकर बनेगा। यानी जहां पेड़ कटने थे, वहां नहीं कटे बल्कि दूसरी जगह पर पेड़ों की कटाई कर दी गई। वन विभाग ने पेड़ों की कटाई के मामले में पौने तीन करोड़ रुपए वसूल किये हैं। अलाइनमेंट छोड़कर दूसरी जगह कटाई होने के मामले में अब यह रकम एनएच अफसरों से वसूल की जा सकती है। करोड़ों की वसूली और मामले की विस्तृत जांच के निर्देश के बाद अब एनएच के अफसरों के हाथ पांव फूलने लगे हैं।

35 किमी का सफर और घंटों का संघर्ष

दुर्ग से रायपुर के बीच 35 किलोमीटर की दूरी तय करना आज यात्रियों के लिए किसी मानसिक प्रताडऩा से कम नहीं है। विडंबना यह है कि जिस सफर को अधिकतम 45 मिनट में पूरा होना चाहिए, उसे तय करने में एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें 2 से 2.5 घंटे का समय ले रही हैं। यह लेटलतीफी अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के आर्थिक संकट का कारण बन रही है। रोज सफर करने वाले कर्मचारी समय पर दफ्तर नहीं पहुँच पा रहे हैं। लगातार ‘हाफ -डे’ लगने और वेतन कटने से उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। घंटों तक आउटर पर ट्रेन खड़ी रहने से यात्रियों में हताशा और तनाव बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर उनके कार्यक्षमता और स्वास्थ्य पर पड़ता है। आधुनिक तकनीक और ट्रैक विस्तार के तमाम दावों के बावजूद हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। एक्सप्रेस ट्रेनों का भी पैसेंजर की तरह चलना रेलवे प्रबंधन की विफलता को दर्शाता है। रेलवे मंडल को यह समझना होगा कि उनके लिए जो केवल ‘मिनटों की देरी’ है, वह एक मजदूर या मध्यमवर्गीय कर्मचारी के लिए ‘रोजी-रोटी’ का नुकसान है।

विधायक पर चढ़ा सत्ता का नशा

कुछ लोगों पर सत्ता का नशा ज्यादा ही चढ़कर बोलने लगता है। पद-सम्मान मिलते ही सत्ता मद में चूर होकर भाजपा की महापौर का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वो एक ठेले वाले को मारने की चेतावनी दे रही हैं। अब एक विधायक पर भी सत्ता का नशा चढ़ गया है। सुशासन तिहार के दौरान विधायक ने कह दिया कि रिश्वतखोर पटवारी को जूता मारेंगे। यह वीडियो वायरल होने के बाद पटवारी संघ ने सुशासन तिहार के बहिष्कार की चेतावनी दी है। जोश-जोश में फ्रंट फुट में खेल रहे विधायक अब बैकफुट पर आ गए हैं। खास बात ये है कि अब राजिम के पटवारी विधायक की पोलपट्टी खोलने पर आमादा हैं। कांग्रेसी भी बहती गंगा में हाथ धोने बेताब है।

शिक्षक बर्बाद कर रहे बच्चों का भविष्य

बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता हैं। इस लिहाज से शिक्षक देश के भविष्य निर्माता हुए। मगर छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षक ऐसे हैं जो बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों में अच्छी-खासी तनखा पाने के बावजूद समय पर स्कूल न जाने, समय से पहले स्कूल से घर लौटने, क्लास के दौरान स्टाफ रूम में गपशप करने जैसी शिकायतों के साथ अक्सर बिना अवकाश लिये छुट्टी लेने के अनगिनत मामले पकड़े जा चुके हैं। छत्तीसगढ़ के 79 शिक्षकों को अगले 3 से 6 वर्ष के लिये मूल्यांकन सहित अन्य पारिश्रमिक कार्यों से बैन कर दिया गया है। इन शिक्षकों ने बोर्ड परीक्षाओं में कापियां जांचते समय लापरवाही की। पुनर्मूल्यांकन के दौरान छात्रों के अंक 20 से 50 अंक बढऩे पर यह कार्रवाई की गई। शिक्षा विभाग के अफसरों का एक वर्ग इन शिक्षकों के मू्ल्यांकन के तरीके की जांच के साथ-साथ शिक्षकीय क्षमता की जांच करने की मांग कर रहा है। सवाल ये है कि हर साल ट्रेनिंग के बावजूद शिक्षक कब ट्रेंड होंग?

कांग्रेसियों का भरोसा नहीं

कांग्रेस का उच्च कमान दिल्ली में बैठकर संगठन को मजबूत बनाने जितनी माथापच्ची करते हैं, निचले स्तर पर कांग्रेस नेता पार्टी की उतनी ही दुर्गति करने में लगे है। अभी कुछ महीने पहले संगठन सृजन के जरिये पूरे देश में जिला और ब्लाक स्तर के साथ-साथ मंडल, वार्ड और बूथ स्तर पर कांग्रेस संगठन का ढांचा नए सिरे से तैयार किया गया। अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ऐसी सभी कमेटियों की जांच कर रही है। कई बार कांग्रेस नेताओं ने कमरे में बैठकर अलग-अलग स्तर की कमेटियां बनाकर लिस्ट भेज दी। बाद में पता चला कि लिस्ट में जिनके नाम हैं, वो भाजपा के लिये काम कर रहे हैं। कईयों को कांग्रेस कार्यकर्ता होने की जानकारी ही नहीं थी। इसीलिये, अब नई कमेटियों की जांच की जा रही है। बड़ी बात ये है कि असंतुष्ट नेता अंदरूनी स्तर पर चल रही छानबीन के बारे में मीडिया को जानकारी दे रहे हैं ताकि, एक-दूसरे पर भरोसा न होने के मामले को तूल दिया जा सके।

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