देश

Blood Bank NAT Testing : ब्लड बैंकों में NAT टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त नहीं, फैसला विशेषज्ञों पर छोड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के ब्लड बैंकों में न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट यानी NAT को अनिवार्य करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई (Blood Bank NAT Testing) से इन्कार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि ब्लड बैंकों में कौन-सी जांच जरूरी होनी चाहिए, यह तय करना कोर्ट का काम नहीं है।

इस तरह के फैसले चिकित्सा विशेषज्ञों, स्वास्थ्य विभाग और नीति बनाने वाली संस्थाओं के स्तर पर ही होने चाहिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे मेडिकल साइंस का जानकार होने का दिखावा नहीं करना चाहिए।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों के पास जाने को कहा

अदालत ने याचिका दायर करने वाली संस्था को राहत देने के बजाय यह रास्ता सुझाया कि वह इस मुद्दे पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभाग के सचिवों के सामने अपना विस्तृत पक्ष रखे। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारी विशेषज्ञों की राय लेकर इस विषय पर उचित फैसला कर सकते हैं। यानी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीधे कोई आदेश देने के बजाय इसे प्रशासनिक और विशेषज्ञ स्तर पर विचार के लिए छोड़ दिया।

कोर्ट ने खर्च और व्यवस्था की चुनौती को भी माना अहम

सुप्रीम Court ने यह भी माना कि NAT टेस्ट को सभी ब्लड बैंकों में लागू करना केवल तकनीकी मसला नहीं है, बल्कि इससे बड़ा आर्थिक बोझ भी जुड़ा है। हर राज्य की अपनी वित्तीय (Blood Bank NAT Testing) सीमाएं हैं और स्वास्थ्य ढांचा भी अलग-अलग है। ऐसे में पूरे देश के लिए एक जैसा आदेश देना आसान नहीं है। अदालत का संकेत साफ था कि किसी भी जांच प्रणाली को अनिवार्य बनाने से पहले उसकी लागत, उपलब्धता और व्यवहारिकता को देखना जरूरी है।

याचिका में क्या मांग की गई थी

याचिका में कहा गया था कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए फैलने वाले संक्रमण, जैसे एचआईवी और हेपेटाइटिस, की जल्दी पहचान के लिए NAT टेस्ट बेहद जरूरी है। मांग यह थी कि देश के सभी ब्लड बैंकों में इसे अनिवार्य किया जाए ताकि सुरक्षित रक्त आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। हालांकि कोर्ट ने इस दलील पर कोई अंतिम टिप्पणी करने के बजाय यही कहा कि इस पर फैसला अदालत नहीं, बल्कि विशेषज्ञ ही करें।

अब आगे क्या

सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद अब यह मामला स्वास्थ्य विभागों के स्तर पर आगे बढ़ सकता है। यदि संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस विषय पर गंभीरता से विचार (Blood Bank NAT Testing) करते हैं, तो ब्लड सेफ्टी को लेकर नई नीति या दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं। फिलहाल अदालत ने इतना साफ कर दिया है कि ब्लड बैंकों में NAT टेस्ट लागू करने का फैसला न्यायिक आदेश से नहीं, बल्कि विशेषज्ञ राय और प्रशासनिक मूल्यांकन के आधार पर ही होगा।

Related Articles

Back to top button