संपादकीय

आज का बेबाक : घुसपैठियों के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच हुई जुबानी जंग

War of words between political parties on the issue of infiltrators: हम भारतीयों में अतिथि देवो भव: की भावना इस कदर कूट-कूट कर भरी गई है कि बिन बुलाए मेहमानों पर भी मेहरबान हो जाते हैं। राह में आये जो दिन दुखी सबको गले से लगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो… गाते हुए हम बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को भी अपने देश में बसा लेते हैं।

जिनकी संख्या करोड़ों हो गई है। नई दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान घुसपैठियों के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग जरूर हुई जो चुनाव निपटते ही भुला दी जाएगी।

हिन्दुस्तान को घुसपैठिस्तान बनाने वालों से कोई नहीं पूछ रहा है कि अतिथि तुम कब जाओगे?

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