संपादकीय

संपादकीय: अब धर्मांतरण कराने वालों की खैर नहीं

Editorial: हाल ही में सुपरिचित विधिवेत्ता अश्वनी उपाध्याय ने देश में बढ़ती धर्मांतरण की घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की थी कि वह धर्मांतरण रोकने पुराने कानून में बदलाव कर नया कड़ा कानून बनाए।

केन्द्र सरकार ने तो इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया है लेकिन नव प्रदेश छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने विधानसभा सत्र के दौरान धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026 को पारित कराकर सही समय में सही दिशा में सही कदम उठाया है।

यह नया कानून ज्यादा प्रभावी सिद्ध होगा और इसके लागू होने से छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण की घटनाओं पर निश्चित रुप से प्रभावी रोक लगेगी। इस नये कानून के मुताबिक अब धर्मांतरण कराने वालों की खैर नहीं क्योंकि अब ऐसा कराने वालों के लिए सात साल से दस साल तक की सजा और पांच लाख रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। नाबालिग, महिला, ओबीसी, एससी एसटी वर्ग के मामलों में तो बीस साल की सजा और दस लाख जुर्माना का प्रावधान है।

वहीं सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास तथा पच्चीस लाख जुर्माना लगाने का प्रावधान है। जाहिर ऐसा कड़ा कानून बनने से धर्मांतरण की घटनाओं पर रोक लगेगी। साय सरकार की यह कारगर पहल निश्चित रुप से स्वागत योग्य कदम है लेकिन विपक्षी पार्टी कांग्रेस सिर्फ विरोध के नाम पर इसका विरोध कर रही है।

जो कतई उचित नहीं है। गौरतलब है कि प्रदेश के बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ही धर्मांतरण की ज्यादा घटनाएं होती रही हैं। कभी हो रही हैं क्योंकि गरीब और भोले भाले आदिवासियों को लालच देना और उनका माइंडवास कर उनका धर्म परिवर्तन कराना अपेक्षाकृत आसान काम होता है। बहरहाल अब नया कठोर कानून बन जाने से छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर रोक लगने की उम्मीद की जानी चाहिए।

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