छत्तीसगढ़

Maoist Ramder Surrender : भूपति–रूपेश के बाद अब रामदेर भी हथियार डालने को तैयार, हिड़मा को घेरने की रणनीति अंतिम चरण में

Maoist Ramder Surrender : माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। भूपति और रूपेश के साथ 271 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद अब केंद्रीय समिति सदस्य रामदेर भी हथियार डालने की इच्छा जता चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक 62 वर्षीय रामदेर ने (Maoist Ramder Surrender) को लेकर सुरक्षा एजेंसियों से प्रारंभिक संपर्क साध लिया है। बताया जा रहा है कि उसके करीब 50 सशस्त्र साथी भी मुख्यधारा में लौटने को तैयार हैं।

https://youtu.be/b44mIm5iYlw

रामदेर बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र के अंदरूनी गांव मज्जी मेण्ड्री का निवासी है। उसे हिड़मा के बाद केंद्रीय समिति में शामिल किया गया था। यह बस्तर का दूसरा माओवादी है, जिसे संगठन में इतना बड़ा पद मिला। उसके समर्पण के बाद (Maoist Ramder Surrender) से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी की कमर पूरी तरह टूट जाएगी और संगठन की शक्ति दक्षिण बस्तर तक सिमट जाएगी, जहां हिड़मा और थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी जैसे शीर्ष माओवादी अब भी सक्रिय हैं।

अब हिड़मा है आखिरी कड़ी

सुरक्षा बल अब माओवादी बटालियन नंबर-1 पर पूरी रणनीति केंद्रित कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार आत्मसमर्पित रूपेश ने खुलासा किया है कि हिड़मा ने सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के प्रभारी थिप्परी तिरुपति के साथ मिलकर संगठन को पुनर्गठित करने का प्रयास शुरू किया है। (Maoist Ramder Surrender) को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अब बड़े स्तर पर समन्वित अभियान की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि हिड़मा, तिरुपति और उनके सहयोगी वर्तमान में छत्तीसगढ़–तेलंगाना सीमा पर सक्रिय हैं और यहीं से संगठन को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं।

150 हथियारों से लैस बटालियन पर फोकस

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि बस्तर की यह बटालियन करीब 150 से अधिक स्वचालित हथियारों से लैस है। आने वाले हफ्तों में हिड़मा को घेरने के लिए बड़े ऑपरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार हो चुका है। (Maoist Ramder Surrender) के बाद सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि दक्षिण बस्तर में माओवादी गतिविधियाँ काफी हद तक थम जाएँगी।

https://youtu.be/Ka8i0TUrhRM

समर्पण का असर और रणनीतिक बढ़त

भूपति और रूपेश के आत्मसमर्पण से न केवल डीकेएसजेडसी की नेतृत्व संरचना कमजोर पड़ी है, बल्कि स्थानीय नेटवर्क भी चरमराने लगा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि रामदेर भी आत्मसमर्पण करता है तो यह बस्तर क्षेत्र में माओवादी शक्ति के लिए निर्णायक झटका होगा। (Maoist Ramder Surrender) से सरकार को पुनर्वास योजनाओं को आगे बढ़ाने और स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा में जोड़ने का अवसर मिलेगा।

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